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देशद्रोह मामले में जमानत के लिए शरजील इमाम ने दायर की याचिका, दिल्ली HC में शुक्रवार को सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा था कि देशद्रोह के आरोप में जेल में बंद कैदी भी जमानत के लिए अपील कर सकते हैं. SC के इस निर्देश के बाद अब शरजील इमाम ने भी दिल्ली हाई कोर्ट में जमानत याचिका लगाई है.

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फाइल फोटो
फाइल फोटो
स्टोरी हाइलाइट्स
  • शरजील इमाम की देशद्रोह मामले में जमानत याचिका
  • दिल्ली हाई कोर्ट शुक्रवार को करेगा सुनवाई

देशद्रोह के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दिल्ली दंगों के आरोपी शरजील इमाम ने गुरुवार को जमानत के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा था कि देशद्रोह के आरोप में जेल में बंद कैदी भी जमानत के लिए अपील कर सकते हैं. इस मामले में हाई कोर्ट शुक्रवार को सुनवाई कर सकता है. 

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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देशद्रोह कानून के इस्तेमाल पर रोक लगा दी और केंद्र के साथ-साथ राज्यों को निर्देश दिया कि जब तक कानून की समीक्षा नहीं हो जाती तब तक देशद्रोह के आरोप लगाने वाली कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाए. 

AMU में भाषण पर लगा था UAPA 

जेएनयू के पूर्व छात्र शरजील इमाम को दिल्ली के जामिया इलाके और यूपी में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने के लिए UAPA लगाया गया था. बाद में दिल्ली की एक अदालत ने शरजील पर देशद्रोह के तहत केस चलाने का आदेश दिया था. 

जनवरी 2020 से हिरासत में शरजील

शरजील इमाम के वकील तनवीर अहमद मीर ने बताया कि नई जमानत याचिका में कहा गया है कि वह जनवरी 2020 से हिरासत में हैं और इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अलीगढ़ में कथित भड़काऊ भाषण देने के मामले में जमानत देते हुए कहा था कि इस भाषण में हिंसा का कोई आह्लान नहीं था. जमानत याचिका में कहा गया है कि इमाम के खिलाफ 25 जनवरी, 2020 को तत्काल FIR दर्ज की गई थी. साथ ही उनके द्वारा दिए गए एक ही भाषण के लिए अलग-अलग राज्यों में चार अन्य FIR दर्ज की गई थीं.

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देशद्रोह के आरोप में हैं जेल में बंद 

एफआईआर में मूल रूप से धारा 124ए (देशद्रोह की सजा), 153ए (धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना), 153बी (राष्ट्रीय एकीकरण के लिए पूर्वाग्रही) के तहत दंडनीय अपराधों के तहत दर्ज की गई थी. आईपीसी की धारा 505(2) (वर्गों के बीच शत्रुता, घृणा या दुर्भावना पैदा करना या बढ़ावा देना) और बाद में गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) की धारा 13 (गैरकानूनी गतिविधियों के लिए सजा) को जोड़ा गया था.
इसके बाद शरजील इमाम को 28 जनवरी, 2020 को बिहार से इस मामले में गिरफ्तार किया गया था और उन्हें 8 दिनों के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था. तब से वो लगातार न्यायिक हिरासत में हैं.

(रिपोर्ट- कनु सारदा)

 

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