दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी और पिंजरा तोड़ अभियान की एक्टिविस्ट देवांगना कलिता की जमानत अर्जी को दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने खारिज कर दिया है. कोर्ट ने देवांगना की जमानत अर्जी को खारिज करते हुए कहा कि कोर्ट के पास पुलिस द्वारा लगाए गए आरोपों पर विश्वास करने के लिए पर्याप्त आधार हैं. कोर्ट ने कहा कि उनके खिलाफ लगे आरोप प्रथम दृष्टया सही लगते हैं.
नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुए दंगा मामले में आरोपित पिंजड़ा तोड़ ग्रुप की सदस्य और जेएनयू की छात्रा देवांगना कलिता पर आरोप है कि उन्होंने प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काई थी.
एक चार्जशीट में दिल्ली पुलिस ने दावा किया था कि नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध करने जहांगीरपुरी से जाफराबाद पहुंची 300 महिलाओं को कथित तौर पर देवांगना कलिता ने हिंसा के लिए उकसाया था. कहा यह भी गया था कि ये महिलाएं अपने साथ हथियार, तेजाब की बोतलें और मिर्च पाउडर लेकर आई थीं.
बता दें कि पिछले साल फरवरी में सीएए के विरोध में प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा में 53 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 200 लोग घायल हो गए थे. इससे पहले दिल्ली पुलिस ने एक चार्जशीट में दावा किया था कि सीएए और एनआरसी के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने वाले आरोपियों को पाकिस्तानी की आईएसआई और खालिस्तानियों का समर्थन मिला था.
दिल्ली दंगों के आरोपियों ने अपने बयान में खुलासा किया था कि दिल्ली दंगों में खालिस्तानियों और ISI एजेंटों की भी भूमिका थी. ISI एजेंट और खालिस्तान समर्थक दिल्ली दंगों से पहले CAA-NRC के खिलाफ चल रहे प्रोटेस्ट में भी लगातार सक्रिय रहे थे.