दिल्ली पुलिस ने उन रिपोर्ट्स का खंडन किया है, जिसमें माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव, अर्थशास्त्री जयती घोष समेत कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं के नाम दिल्ली दंगों के मामले में सप्लीमेंट्री चार्जशीट शामिल करने की बात की गई है.
सवाल उठने पर दिल्ली पुलिस ने सफाई देते हुए जारी बयान में कहा है, 'जाफराबाद दंगों से संबंधित मामले की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में शिक्षाविदों और राजनेताओं का नाम आना चिंतित करने वाला है. एंटी-सीएए विरोध प्रदर्शनों को आयोजित करने के मामले में एक आरोपी के डिस्कलोजर में ये नाम सामने आए हैं.
इस बयान को उसी तरह दर्ज किया गया है, जैसे आरोपी ने बताया है. किसी शख्स को किसी के सिर्फ डिस्क्लोजर स्टेटमेंट के आधार पर आरोपी नहीं बनाया जा सकता है. हालांकि पर्याप्त सबूतों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाती है. मामला अभी सब-जूडिस है.'
जहरीले भाषण देने वालों पर एक्शन क्यों नहीं-येचुरी
दिल्ली पुलिस के चार्जशीट को लेकर माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए हैं. सीताराम येचुरी ने ट्वीट किया, दिल्ली पुलिस बीजेपी की केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय के नीचे काम करती है. उसकी ये अवैध और ग़ैर-क़ानूनी हरकतें बीजेपी के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व के चरित्र को दर्शाती हैं. वो विपक्ष के सवालों और शांतिपूर्ण प्रदर्शन से डरते हैं, और सत्ता का दुरुपयोग कर हमें रोकना चाहते हैं.
सीताराम येचुरी ने कहा कि 56 लोग दिल्ली की हिंसा में मारे गए. जहरीले भाषणों का वीडियो है, उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है? क्योंकि सरकार ने आदेश दिया है कि विपक्ष को लपेटा जाए, किसी भी तरह से. यही है मोदी और बीजेपी का असली चेहरा, चरित्र, चाल और चिंतन. विरोध तो होगा इसका.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार योगेंद्र यादव ने रिपोर्ट को तत्काल 'तथ्यात्मक रूप से गलत' करार दिया है. योगेंद्र यादव ने कहा, 'मैंने नोटिस किया कि पासिंग रेफरेंस में मेरे भाषण का एक वाक्य भी नहीं है. मुझे यह आश्चर्यजनक लगता है कि दिल्ली पुलिस ने मेरे भाषणों की रिकॉर्डिंग देखने की जहमत तक नहीं उठाई जो पब्लिक डोमेन में हैं.'
वहीं जब दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त (क्राइम) प्रवीण रंजन से इस संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि इन लोगों का नाम सिर्फ डिस्क्लोजर ऑफ चार्जशीट में है.
क्या है चार्जशीट में
दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक एक आरोपी गुलफिशा फातिमा गुल ने माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव, अर्थशास्त्री जयती घोष, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और सामाजिक कार्यकर्ता अपूर्वानंद, और डॉक्युमेंट्री फिल्म निर्माता राहुल रॉय का नाम लिया था. दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में इसका पेज नंबर 17 पर जिक्र है.
दिल्ली पुलिस के सप्लीमेंट्री चार्जशीट की प्रति इंडिया टुडे के पास भी है जिसे दिल्ली में 23-26 फरवरी के दौरान हुई हिंसा को लेकर दाखिल किया गया है. इस हिंसा में 53 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 581 लोग घायल हो गए थे. 97 लोग गोली लगने से घायल बताए गए हैं.
तीन छात्राओं के बयान के आधार पर इन प्रतिष्ठित लोगों का नाम चार्जशीट में शामिल किया गया है. पिंजरा तोड़ की सदस्य और जेएनयू की छात्रा देवांगना कलिता, नताशा नरवाल, और जामिया मिल्लिया इस्लामिया की गुलफिशा फातिमा के बयान पर इन लोगों का नाम सप्लिमेंट्री चार्जशीट में शामिल किया गया है. इन छात्रों पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं.