दिल्ली के सीमापुरी में बुधवार को एक चार मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई. कुछ ही देर में पूरा मलबा सड़क पर था. इस हादसे में अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें एक 12 साल की बच्ची और एक बच्चा शामिल हैं. मलबे से 11 लोगों को बाहर निकाला गया है.
DCP आर मीणा ने बताया कि यह इमारत करीब 25 गज के प्लॉट पर बनी थी. इमारत गिरने की सूचना मिलते ही राहत और बचाव टीम मौके पर पहुंची. मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों की तलाश की जा रही है. रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है.
रेस्क्यू किए गए घायलों में 56 साल के मोमिन मिर्जा, 3 साल के अब्दान, 28 साल के अब्दुल रहमान, 28 साल के देवरुद्दीन, 50 साल की सलमा, 34 साल के छोटे, 35 साल की सकीना और 30 साल के समद शामिल हैं. सभी को इलाज के लिए राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल भेजा गया है.
हादसे में 3 लोगों की मौत
इस हादसे में 3 लोगों की जान गई है. मृतकों में एक करीब 12 साल की बच्ची, 21 साल की गुलफसा और एक बच्चा शामिल है.
मौके पर पहुंचीं दमकल की चार गाड़ियां
हादसे की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की चार गाड़ियां मौके पर पहुंचीं. रेस्क्यू टीम मलबे को हटाने में जुटी है. कोशिश है कि अगर कोई व्यक्ति अंदर फंसा है तो उसे जल्द बाहर निकाला जा सके.
फिलहाल यह साफ नहीं है कि हादसे के वक्त इमारत के अंदर कुल कितने लोग मौजूद थे. मलबे में फंसे लोगों की सही संख्या का भी अभी पता नहीं चल पाया है. इमारत किस वजह से गिरी, यह भी स्पष्ट नहीं है. बचाव टीम मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश कर रही है.
दिल्ली में इमारत गिरने का यह हादसा ऐसे समय हुआ है, जब हाल में सत्य निकेतन में एक बड़ी इमारत ढहने की घटना सामने आई थी. दरअसल, 6 सितंबर 2026 को दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला PG इमारत गिर गई थी. उस हादसे में 5 स्टूडेंट्स समेत 7 लोगों की मौत हुई थी. उस मामले में MCD के पांच अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया था. इनमें डिप्टी कमिश्नर, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर शामिल थे.
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने बिना अनुमति बनी पांचवीं मंजिल वाली इमारतों को सील करने का आदेश दिया था. आसपास के PG और दूसरी इमारतों की जांच की बात भी कही गई थी. नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई का निर्देश दिया गया था. इसके अलावा, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पुरानी इमारतों के स्ट्रक्चरल ऑडिट की बात कही थी. प्रस्तावित नियम के तहत 20, 30 या 40 साल पुरानी इमारतों की सुरक्षा जांच कराए जाने की बात सामने आई थी. हालांकि, सीमापुरी में गिरी इमारत की वजह अभी साफ नहीं है. फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है.
ऐसे में सीमापुरी का यह हादसा एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि पुरानी और कमजोर इमारतों की सुरक्षा को लेकर जमीन पर कितनी सख्ती से जांच हो रही है.