दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को ट्रैफिक जाम की वजह से सुनहरी बाग मस्जिद के प्रस्तावित विध्वंस के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है. अदालत का कहना है कि इसी तरह की एक याचिका पहले से ही हाई कोर्ट की सिंगल बेंच के समक्ष लंबित है तो फिर इस पर आदेश पारित करने की जरूरत नहीं है.
हाई कोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनमीत पीएस अरोड़ा की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए पूछा कि जब कोर्ट में एक याचिका पहले से ही लगी हुई है तो फिर जनहित याचिका दायर करने का क्या मतलब है. वक्फ वेलफेयर फोरम की ओर से दायर की गई इस याचिका का केंद्र, दिल्ली पुलिस, दिल्ली वक्फ बोर्ड और NDMC के वकीलों ने कड़ा विरोध किया. इनकी ओर से कहा गया कि याचिका में सुनहरी बाग मस्जिद के इमाम द्वारा एकल न्यायाधीश के समक्ष दायर याचिका में कही गई बातों की नकल की गई है.
क्या है दिल्ली में 150 साल पुरानी सुनहरी बाग मस्जिद का मामला, जिसे हटाने के फैसले पर हो रहा विवाद
पहले से ही कोर्ट में है याचिका
सुनहरी बाग मस्जिद के इमाम अब्दुल अजीज ने हाई कोर्ट की सिंगल बेंच के सामने NDMC के 24 दिसंबर, 2023 के सार्वजनिक नोटिस को चुनौती दी है, जिसमें आम जनता से मस्जिद को हटाने के संबंध में आपत्तियां/सुझाव देने को कहा गया है.
NDMC ने क्या कहा था?
इसी याचिका पर दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) ने कोर्ट में हलफनामा करते हुए बताया था कि लुटिंयस जोन में ट्रैफिक सिस्टम को सुरक्षित और सुचारू रूप से चलाने के लिए 150 साल पुरानी इस मस्जिद को हटाए जाने की जरूरत है.