दिल्ली दंगों के आरोपी शाहरुख पठान ने दिल्ली हाईकोर्ट में जमानत अर्जी लगाई है. इस पर हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस कर जवाब मांगा है. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को इस मामले में 6 दिन में अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं.
शाहरुख पठान की तरफ से कहा गया है कि फिलहाल जेल में कैदियों को कोरोना के संक्रमण से बचाने के लिए उसे 45 दिन की अग्रिम जमानत पर रिहा कर दिया जाए. शाहरुख पठान की तरफ से पेश हुए उसके वकील असगर खान ने कोर्ट से कहा है कि जमानत की सभी शर्तों का पालन करने के लिए वो तैयार है.
इसके अलावा उसके पिता का नी-रिप्लेसमेंट (घुटने का ऑपरेशन) होना है, इसलिए घर की परिस्थितियों को देखते हुए उसे जमानत दी जाए. जमानत अर्जी में शाहरुख पठान की तरफ से कहा गया है कि ये पहली एफआईआर है जो उसके खिलाफ दर्ज की गई है. उसका कोई पुराना क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है. इस मामले से जुड़े दूसरे आरोपी को भी कोर्ट से जमानत मिल चुकी है. अपनी अर्जी में शाहरुख पठान ने कहा है कि पुलिस इस मामले में चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है.
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कड़कड़डूमा कोर्ट कुछ दिन पहले ही उसकी जमानत अर्जी को खारिज कर चुका है. दिल्ली पुलिस की तरफ से भी जमानत अर्जी का यह कहकर विरोध किया गया था कि जांच के इस मोड़ पर जमानत देना पूरे केस के लिए घातक साबित हो सकता है. पिछले साल हुए दिल्ली दंगों में शाहरुख पठान ने दिल्ली पुलिस के जवान पर ही पिस्तौल तान दी थी. हाईकोर्ट अब शाहरुख पठान की जमानत अर्जी पर अगली सुनवाई 4 जून को करेगा.
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शाहरुख पठान को 3 मार्च को क्राइम ब्रांच ने उत्तर प्रदेश के शामली से गिरफ्तार किया था. शाहरुख के पास से वह पिस्टल भी बरामद कर ली गई थी जो उसने कांस्टेबल दीपक दहिया पर तानी थी. 8 मई को निचली अदालत में उसकी जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने इसका विरोध किया और कहा था कि शाहरुख को इस मामले में जमानत बिल्कुल नहीं मिली चाहिए. इसके बाद कड़कड़डूमा कोर्ट ने उसकी जमानत अर्जी को खारिज कर दिया था.