देश की राजधानी दिल्ली में उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के बीच अधिकारों का झगड़ा एक नए मोड़ पर आ गया है. केंद्र सरकार द्वारा LG के अधिकार बढ़ाने के फैसले के बाद दिल्ली में राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है. भारतीय जनता पार्टी के सांसद मनोज तिवारी ने डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के आरोपों का जवाब देते हुए कहा है कि आम आदमी पार्टी ने LG के अधिकारों का अतिक्रमण कर लिया है.
'आजतक' से खास बातचीत में उत्तरी पूर्वी दिल्ली से BJP सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि दिल्ली एक Union Territory(UT) है और UT होने के नाते उपराज्यपाल को कई ऐसे अधिकार हैं जिसको मजबूत करने की कोशिश की गयी है.
आगे मनोज तिवारी ने किसान आंदोलन के दौरान दिल्ली पुलिस को भेजी गयीं डीटीसी बसें हटाने के दिल्ली सरकार के फैसले का उदाहरण भी दिया. मनोज तिवारी ने कहा कि सालों से परंपरा है कि पुलिस को सुरक्षा के लिए डीटीसी बस दी जाती है, लेकिन अरविंद केजरीवाल के घर हमला हो जाये तो क्या दिल्ली सरकार डीटीसी बस नहीं देगी, क्या लाल किला और दिल्ली के सभी इमारतों के लिए ज़िम्मेदार नही हैं, जब बस छीनी जाती हैं तब लगता है कि UT के तहत LG के अधिकार मजबूत होने चाहिए.
वहीं, मोदी कैबिनेट द्वारा LG के अधिकार बढ़ाने वाले बिल को मंजूरी मिलने के बाद दिल्ली सरकार में डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने भाजपा पर पीछे के दरवाजे से दिल्ली में शासन करने का आरोप लगाया है. मनीष सिसोदिया के आरोप का जवाब देते हुए BJP सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि पीछे ऐसा कौन सा दरवाजा है, जहां से दिल्ली सरकार के अधिकार का हनन हुआ है, दरअसल ऐसा कोई दरवाजा नहीं है, बल्कि सच्चाई ये है कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी ऐसे कई दरवाजों को बंद करके दिल्ली में लोगों के साथ अत्याचार कर रही हैं, हम इसे सिद्ध भी करेंगे.
दिल्ली बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि एलजी के अधिकार बढ़ेंगे तो दिल्ली का विकास होगा, UT होने के बावजूद दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने उपराज्यपाल के कई अधिकारों का अतिक्रमण कर लिया है, जिसे जरूर दुरुस्त किया जाएगा.
आपको बता दें कि दिल्ली के उपराज्यापल को और अधिक अधिकार देने वाले बिल को केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दी थी. सूत्रों के मुताबिक, गवर्नमेंट ऑफ़ एनसीटी दिल्ली ऐक्ट में कुछ संशोधन कर दिल्ली की निर्वाचित सरकार को तय समय में ही एलजी के पास विधायी और प्रशासनिक प्रस्ताव भेजने का प्रावधान भी है, यह बिल इसी सत्र में पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया गया है.
इनमें उन विषयों का भी उल्लेख है, जो विधानसभा के दायरे से बाहर आते हैं. संशोधन के मुताबिक, अब विधायी प्रस्ताव एलजी के पास कम से कम 15 दिन पहले और प्रशासनिक प्रस्ताव सात दिन पहले पहुंचाने होंगे.