दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने से कुछ दिन पहले, यमुना नदी को तीन साल में भारी प्रदूषण से मुक्त करने की रणनीति बनाई गई है. दिल्ली के एलजी ने नदी की सफाई का काम शुरू करने के निर्देश दे दिए और कालिंदी कुलंज घाट पर नदी की सफाई का काम शुरू हो गया है. दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने यमुना सफाई अभियान के लिए अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसके बाद गाद हटाने और खरपतवार निकालने के लिए आधुनिक मशीनें लगाई गई हैं.
अधिकारियों के मुताबिक, यमुना नदी को भारी प्रदूषण से पूरी तरह मुक्त करने के लिए तीन साल की योजना पर काम किया जा रहा है. यमुना को साफ करने के लिए ट्रैश स्कीमर, खरपतवार निकालने वाली मशीनें और ड्रेजर का इस्तेमाल किया जा रहा है.
ITO घाट पर कोई मशीन या काम शुरू नहीं हुआ है, जबकि कुछ अन्य घाटों पर सफाई मशीनों की तैनाती देखी गई है, इनमें एक वासुदेव घाट भी है, जहां पर सफाई की मशीनों को तैनात किया गया है.
PM ने किया था वादा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 फरवरी को पार्टी मुख्यालय में बीजेपी की जीत के जश्न के दौरान यमुना को प्रदूषण मुक्त करने के लिए हरसंभव कोशिश करने का वादा किया था. दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने शनिवार को मुख्य सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव (सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण) से मुलाकात की और उन्हें यमुना की सफाई का काम शुरू करने का निर्देश दिया.
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एलजी ऑफिस के सूत्रों ने India Today TV को बताया कि प्रोजेक्ट के प्रभावशाली रणनीति बनाई गई है, जो इस तरह है...
कचरे और गाद हटाई जाएंगी: यमुना की मुख्य धारा में जमे कचरे, गाद और अन्य प्रदूषकों को हटाने पर जोर दिया जाएगा.
नालों की सफाई: नजफगढ़ नाले, अन्य सप्लीमेंट्री नाले और नदी में मिलने वाले अन्य सभी अहम जल निकासी चैनलों में एक साथ सफाई अभियान चलाए जाएंगे.
सीवेज उपचार संयंत्रों (STPs) की निगरानी: बेहतरीन तरीके से नदी की सफाई करवाने के लिए मौजूदा STP के परफॉर्मेंस और आउटपुट का हर रोज मूल्यांकन किया जाएगा.
उपचार बुनियादी ढांचे का विस्तार: करीब 400 मिलियन गैलन हर रोज सीवेज के उपचार में मौजूदा कमी को दूर करने के लिए नए STPs और डीसेंट्रलाइज्ड एसटीपी के निर्माण के लिए एक योजना बनाई जाएगी.
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मल्टी एजेंसी मॉनीटरिंग: यमुना को साफ करने के लिए शुरू किए जा रहे प्रोजेक्ट में तीन साल के अंदर यमुना को बहाल करने का टार्गेट रखा गया है, जिसके लिए दिल्ली जल बोर्ड (DJB), सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग (I&FC), दिल्ली नगर निगम (MCD), पर्यावरण विभाग, लोक निर्माण विभाग (PWD) और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) सहित कई एजेंसियों द्वारा प्रयास किए जाएंगे.
इसके अलावा, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) को इंडस्ट्रियल यूनिट्स की सख्त निगरानी करने का निर्देश दिया गया है, जिससे यह तय किया जा सके कि अनुपचारित गंदगी शहर की नालियों में न बहाया जाए.
(कुणाल कुमार के इनपुट के साथ)