ठंड की दस्तक के साथ ही दिल्ली में प्रदूषण लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनने लगा है. दिल्ली के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर सामान्य से ज्यादा होने के बाद, सरकार रोकथाम के लिए कदम उठा रही है. नए आदेश के मुताबिक 15 मार्च तक शादियों में इस्तेमाल होने वाले डीजल जनरेटर पर रोक लगा दी गयी है.
देश की राजधानी में बढ़ते प्रदूषण स्तर को देखते हुए दिल्ली पॉल्युशन कंट्रोल कमेटी ने आदेश जारी कर 15 मार्च 2018 तक के लिए डीजल जनरेटर पर प्रतिबंध लगाया है. ऊर्जा विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी के नोटिस को अखबारों में छापा गया है. इस नोटिस में दिल्ली वालों को डीजल जनरेटर पर प्रतिबंध के अलावा शादी या अन्य कार्यक्रम के लिए बिजली कंपनियों से अस्थायी कनेक्शन लेने की अपील की गयी है.
आम आदमी पार्टी सरकार के मुताबिक प्रदूषण से निपटने के लिए कई अहम कदम उठाए गए हैं. दिल्ली सरकार का दावा है कि हवा में ज़हरीली गैस की बढ़त देखते हुए 15 अक्टूबर को एनटीपीसी का प्लांट बंद कराया गया है. इसके अलावा डस्ट कंट्रोल करने के लिए मकान या सड़क के निर्माण का मलवा ढककर ले जाने के आदेश दिए गए हैं. इसके अलावा इसकी जांच के लिए लैंड से संबंधित एजेंसी को जिम्मेदारी दी गई है.
सरकार दावा कर रही है कि दिल्ली में खुले में कूड़ा और पत्ते नहीं जलाने के आदेश हैं. अगर किसी इलाके में कूड़ा जल रहा है तो एसडीएम को एक्शन लेने का पावर है. पीडब्ल्यूडी की सड़कों के बीच डिवाइडर को पानी से साफ किया जाता है. यह हफ्ते में एक बार होता है. इस काम के लिए मशीनें किराए पर भी ली जाती हैं. हालांकि हक़ीक़त यह है कि सभी नियमों की धड़ल्ले से धज्जियां उड़ाई जाती हैं.
सरकार को दिल्ली में उन तमाम बड़ी इंडस्ट्री की जांच करनी होती है जो एक लेवल के बाद अधिक प्रदूषण फैलाती हैं. अगर नियमों के खिलाफ प्रदूषण बढ़ता है तो एक्शन लिया जाता है. सरकार ने इसकी जांच के लिए 5 सदस्यीय टीम भी बनाई है. साथ ही दिल्ली सरकार ने व्हाट्सएप नंबर जारी किया है जिस पर तस्वीर भेजकर कूड़ा जलाने की शिकायत कर सकते हैं.
दिल्ली में ऐसे ट्रकों की एंट्री भी प्रतिबंधित है जो दिल्ली के रास्तों को बायपास की तरह इस्तेमाल करते हैं या उन ट्रकों में दिल्ली का सामान लोड नहीं होता है. इन ट्रकों को चेक करने की ज़िम्मेदारी दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की है. हालांकि तमाम प्रतिबंध, रोकटोक और नियमों के बावजूद दिल्ली का प्रदूषण कम होता नजर नहीं आ रहा है.