दिल्ली की डीटीसी में पहली महिला बस चालक के तौर पर करीब छह साल पहले तेलंगाना की रहने वाली वी सरिता ने इतिहास रच दिया था. सरिता ने साल 2015 में बतौर ड्राइवर डीटीसी ज्वाइन किया था. तब से अब तक छह साल लंबा समय गुजर चुका है. आज भी सरिता डीटीसी की इकलौती महिला बस चालक हैं. दिल्ली सरकार ने अब अपनी परिवहन सेवा से ज्यादा से ज्यादा महिला ड्राइवरों को जोड़ने के प्रयास शुरू कर दिए हैं.
दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत (Delhi Transport Minister Kailash Gehlot) ने विभाग के अधिकारियों और एनजीओ आजाद फाउंडेशन (NGO Azad Foundation) के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की. इस बैठक में सार्वजनिक परिवहन बसों में महिला ड्राइवरों (Women Drivers) की संख्या बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की गई. इस दौरान हाइट का मसला भी उठा. कहा ये भी गया कि न्यूनतम हाइट 162 सेमी से घटाकर 159 सेमी कर दिया गया है. इसके बावजूद अधिकांश महिलाएं योग्य नहीं हैं.
दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने इस संबंध में कहा कि नियम उस समय के हैं जब मानक फ्लोर बसें थीं और ड्राइवर की सीट तय की जाती थी. अब, हमारे पास सभी लो-फ्लोर बसें हैं और ड्राइवर की सीट को एडजस्ट भी किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि इसके अलावा बहुत बड़े विंडस्क्रीन से साफ दृश्य भी दिखाई देता है. हमने सभी को बुलाया है. ऐसे सभी मुद्दों पर चर्चा कर जो बाधाएं होंगी उन्हें दूर किया जाएगा.
गौरतलब है कि सरिता जैसी कई ऐसी महिलाएं हैं जो सडकों पर बसें दौड़ाना चाहती हैं लेकिन कई बार उनकी हाइट कम होने के कारण उन्हें रिजेक्ट कर दिया जाता है. सरिता आनंद विहार से कापसहेड़ा के बीच लंबे और सबसे अधिक व्यस्त रहने वाले रूट पर बस चलाती हैं. भले ही वह बस में चालक होती हैं लेकिन अक्सर ही उन्हें मनचलों से जेब कतरों तक का सामना करना पड़ता है. वो इन सब से कभी घबराईं नहीं और वह अन्य लड़कियों को भी निडर रहने को कहती हैं.
(रिपोर्ट- तेजश्री)