दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिले पर चल रही तकरार खत्म होती नहीं दिख रही है. हाई कोर्ट ने फिलहाल डीयू-यूजीसी विवाद पर सुनवाई करने में असमर्थता जता दी है. कोर्ट का कहना है कि मामले पर विस्तृत सुनवाई की जरूरत है.
दरअसल वेकेशन बेंच के एक जज जस्टिस बीके राव दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (DUTA) के वकील रहे हैं. इसलिए मामले की सुनवाई अब एक जुलाई को हाई कोर्ट की दूसरी बेंच करेगी.
गौरतलब है कि DUTA के पूर्व अध्यक्ष आदित्य नारायण मिश्रा ने मंगलवार को मामले में सुप्रीम कोर्ट से दखल की मांग की थी. लेकिन शीर्ष कोर्ट ने दखल से इनकार करते हुए हाई कोर्ट में अर्जी देने को कहा था. भूख हड़ताल पर बैठे मिश्रा ने बुधवार को हाई कोर्ट में अपील की, जिस पर उन्हें यह जवाब मिला.
वीसी के इस्तीफे पर सस्पेंस!
इससे पहले मंगलवार को यूनिवर्सिटी के वीसी दिनेश सिंह के इस्तीफे की खबर को मधु किश्वर ने खारिज कर दिया
है. पहले वीसी दिनेश सिंह के इस्तीफे की खबर आई थी. हालांकि डीयूएसी की सदस्य मधु किश्वर के इस दावे के
बाद दिनेश सिंह के इस्तीफे को लेकर सस्पेंस पैदा हो गया. मानव संसाधन मंत्रालय ने भी वीसी का इस्तीफा नहीं
मिलने की पुष्टि की है.
मधु किश्वर ने यूजीसी और मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. मधु किश्वर ने दावा किया है कि वीसी दिनेश सिंह पर इस्तीफे का दबाव बनाया जा रहा है. यूजीसी के अधिकारियों ने उन्हें धमकाया भी था कि अगर बात नहीं मानी तो एफआईआर दर्ज कराई जाएगी. मधु किश्वर ने यह भी कहा कि दिनेश सिंह सोमवार को शिक्षा मंत्री से मिलने गए थे लेकिन स्मृति ईरानी उनसे नहीं मिलीं.
नहीं जारी हुई कट ऑफ लिस्ट
चार साल के पाठ्यक्रम पर जारी गतिरोध का असर दाखिले पर पड़ा है और मंगलवार को पहली कट ऑफ लिस्ट भी
जारी नहीं हुई. चार साल के ग्रेजुएशन कोर्स के विरोध के बावजूद डीयू इस पर अड़ा हुआ है. खबर यह भी है कि
बीटेक कोर्स को चार साल का बनाए रखने और बीए और बीकॉम को तीन साल का करने के फॉर्मूले पर
सलाह-मशविरा किया जा रहा है.
कॉलेज प्रिंसिपल्स ने लिया एडमिशन न लेने का फैसला!
बताया जा रहा है कि चार साल के कोर्स पर विवाद के चलते डीयू के सभी कॉलेजों के प्रिंसिपल ने बैठक कर फैसला
लिया है कि विवाद सुलझने तक दाखिला नहीं होगा. दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन की अध्यक्ष नंदिता
नारायण ने भी कहा, 'मौजूदा हालात में दाखिला नहीं होना चाहिए.'