मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे सत्येंद्र जैन, उनकी पत्नी और 8 अन्य के खिलाफ एक चार्जशीट दाखिल की है. इस पर दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए ईडी से कई सवाल किए और सुनवाई के दौरान उसे कई बातों के लिए कड़ी फटकार भी लगाई.
कोर्ट ने आरोपियों को किया समन
विशेष न्यायाधीश गीतांजलि गोयल ने इस मामले में अब उन सभी आरोपियों को समन किया है, जिन्हें अभी तक हिरासत में नहीं लिया गया है. इसमें मामले में आरोपी 4 कंपनियां भी शामिल है. अब मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को होगी. इसी के साथ अदालत ने मामले में आरोपी अजीत कुमार जैन और सुनील कुमार जैन को अंतरिम जमानत दे दी है. उन्हें ये जमानत 1 लाख रुपये के निजी मुचलके पर दी गई है.
कोर्ट ने अजीत और सुनील जैन के वकीलों को अगली तारीख पर नियमित जमानत याचिका दाखिल करने के लिए कहा है. सुनवाई के दौरान सत्येंद्र जैन वीडियो कॉल से जुड़े हुए थे. जबकि अंकुश और वैभव जैन को न्यायिक हिरासत से कोर्ट लाया गया था.
ED को लगी कड़ी फटकार
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ईडी को भी कड़ी फटकार लगाई. कोर्ट ने कहा कि ईडी ने अपनी चार्जशीट में गलत तरीके से सत्येंद्र जैन को आरोपी कंपनियों का 'जिम्मेदार व्यक्ति' बताया है, जबकि वो ना तो इन कंपनियों में डायरेक्टर हैं और ना ही इससे जुड़े हुए हैं.
कोर्ट ने ईडी से सवाल किया- कैसे ये कंपनियां सिर्फ सत्येंद्र जैन का नाम लिख देने से उनकी हो जाएंगी? क्या आप पहली बार कोई मामला दायर कर रहे हैं? केवल सिर्फ इसलिए कि 'सत्येंद्र जैन के माध्यम से' लिखा है तो कंपनी उसकी नहीं हो जाएगी. कोर्ट को दस्तावेज देने से पहले आपने उसकी पड़ताल नहीं की थी क्या?
इसके अलावा ईडी को कोर्ट में दस्तावेजों की मूल प्रति की जगह फोटोकॉपी जमा कराने के लिए भी फटकार लगी. जज ने ईडी से पूछा क्या यही आपके काम करने का तरीका है?
जांच एजेंसी की ओर से कोर्ट में पेश हुए एडीशनल सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू ने कोर्ट को विश्वास दिलाया कि सुनवाई की अगली तारीख पर वे एक संशोधित मेमो दायर करेंगे.
जांच शुरू होने और हिरासत में लिए जाने से पहले सत्येंद्र जैन दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य, बिजली और कुछ अन्य विभागों के मंत्री थे. अभी वो सरकार में बिना विभाग के मंत्री हैं. ईडी ने जैन को 30 मई को गिरफ्तार किया था.