दिल्ली-एनसीआर में प्याज की कीमतें पेट्रोल और सेब से भी महंगी हो चली हैं. रिटेल बाजार में प्याज की कीमत 80 रुपये किलो है और अब जाकर इन बेकाबू कीमतों पर सरकार नींद से जागी है. प्याज की कीमतों पर चर्चा के लिए मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने नैफेड चेयरमैन को बुलाया है.
नैफेड के चेयरमैन वीरेंद्र का कहना है कि प्याज उत्पादक राज्यों में ज्यादा बारिश के कारण प्याज की किल्लत हुई है. नैफेड ने भरोसा दिलाया है कि दिल्ली के लिए आयात किया गया प्याज जल्द ही लोगों तक पहुंच जाएगा. उन्होंने ये भी कहा है कि चूंकि अभी तक सरकार ने प्याज पर किसी तरह सब्सिडी का एलान नहीं किया है, इसलिए लोगों को बाजार भाव पर ही प्याज मिलेगा.
पिछले महीने प्याज की कीमत में रिकार्ड उछाल आया था. दिल्ली सरकार ने सस्ती प्याज बेचने के लिये दुकानें तक खोल ली, बाजार में प्याज की आमद बढ़ी तो दाम कुछ कम हुए, लेकिन एक बार फिर प्याज की कीमतें आसमान छू रही हैं. आलम यह है कि दिल्ली-एनसीआर में प्याज अमीरों का फल कहे जाने वाले सेब से भी तकरीबन दोगुने दाम पर बिक रहा है.
नोएडा सेक्टर-39 के पास सोमवार को लगने वाली सब्जियों के एक साप्ताहिक बाजार में प्याज 70 से 75 रुपये के बीच बिका, जबकि इसी बाजार में शिमला से आने वाला सेब 40 रुपये प्रति किलो और अच्छी किस्म का कश्मीरी सेब 60 रुपये किलो बिक रहा है. ऐसे साप्ताहिक बाजार में आमतौर पर दूसरे फुटकर दुकानों से सस्ता सामान मिलता है, लेकिन यहां भी इन दिनों प्याज की कीमतें आसमान छू रही हैं.
फलों की दुकान लगाये एक दुकानदार अफरोज ने बताया कि बाजार में सेब की आमद काफी ज्यादा है और इसकी वजह से सेब अपनी किस्म और क्वालिटी के मुताबिक 40 से 60 रुपये के बीच फुटकर बाजार में बिक रहा है. रेहड़ी पर प्याज बेच रहे सरोज कुमार ने बताया कि जब पीछे से ही प्याज मंहगा आ रहा है, तो सस्ता प्याज कैसे बेचें. गाजीपुर मंडी से 320 रुपये प्रति पांच किलो के हिसाब से प्याज मिल रहा है.
प्याज ने लोगों के किचन का बजट बिगाड़ दिया है. गृहणियां कहती हैं कि 50 से 55 रुपये किलो तक भी दाम ठीक था, लेकिन 75-80 रुपये तो बहुत ज्यादा है.
अगस्त में जब प्याज के दाम 90 रुपये तक पहुंच गये थे तो दिल्ली सरकार ने सस्ता प्याज बेचने के लिए मोबाइल शॉप खोली थी. सरकार दुकान को देखकर सभी पार्टियों में सबसे सस्ता प्याज बेचने की होड़ लग गई थी. दाम एक बार फिर बढ़ रहे हैं, दिल्ली सरकार के मंत्री राजकुमार चौहान फिर कह रहे हैं कि अगर जरूरत पड़ी तो सरकार फिर से सरकारी दुकानों में प्याज बेचेगी.