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प्रदर्शन के बीच टिकैत ने चेताया, बोले- हमारे 4 लाख ट्रैक्टर और 25 लाख आदमी तैयार

किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा है कि हमारे चार लाख ट्रैक्टर और 25 लाख आदमी तैयार हैं. उन्होंने कहा कि 9 और 24 जुलाई को दो यात्राएं निकलेंगी, जिसमें बड़ी संख्या में किसान मौजूद होंगे.

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राकेश टिकैत
राकेश टिकैत
स्टोरी हाइलाइट्स
  • राकेश टिकैत बोले- 4 लाख ट्रैक्टर, 25 लाख आदमी तैयार
  • कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान

केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले सात महीनों से दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर किसान प्रदर्शन कर रहे हैं. किसानों ने आज बड़ा प्रदर्शन बुलाया है. इस बीच, किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा है कि हमारे चार लाख ट्रैक्टर और 25 लाख आदमी तैयार हैं.

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उन्होंने एक बैठक करने के बाद कहा कि दो बातें तय हुई हैं. 9 को शामली से एक यात्रा निकलेगी, जो कि बागपत होते हुए सिंघु पर जाएगी. इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे. वहीं, दूसरी यात्रा 24 जुलाई को निकलेगी, जो कि बिजनौर से चलेगी और फिर मेरठ रुकेगी. उसके बाद गाजीपुर आएगी. अभी दिल्ली जाने की तारीख तय नहीं हुई है.

कुछ देर पहले, राकेश टिकैत ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के फैसले पर बड़ा बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि आर्टिकल 370 हटाने का फैसला सही है, लेकिन वहां के किसानों को, आम जनता को नुकसान हुआ है, क्योंकि 370 हटने के बाद उन्हें पैकेज भी नहीं मिल रहा है.

टिकैत ने कहा था, "हमें लगा था कि 370 बड़ा मसला है, जो सॉल्व हो गया. 370 हटा तो अच्छा लगा, लेकिन वहां के किसानों को, आम जनता को नुकसान हुआ है. हम वहां की जनता के साथ हैं." उन्होंने कहा, "उन्हें जो पहले ट्रांसपोर्ट पैकेज मिलता था, वो अभी भी मिलता रहे. उनका मकसद है कि पैकेज न हटे. पैकेज मिलता रहे.''

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किसानों के प्रदर्शनों के बीच राकेश टिकैत की गिरफ्तारी की अफवाहें भी फैल गईं, जिसको लेकर दिल्ली पुलिस ने सफाई भी दी. पुलिस ने टिकैत की गिरफ्तारी की खबरों को फर्जी बताया. पुलिस ने कहा कि अगर कोई इस तरह की फेक न्यूज फैलाता है तो उसके खिलाफ ऐक्शन लिया जाएगा.

मालूम हो कि हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़ी संख्या में किसान सात महीनों से प्रदर्शन कर रहे हैं. किसानों के इस प्रदर्शन के शनिवार को सात महीने पूरे हुए हैं, जिस वजह से किसानों ने राज्यपालों से मिलकर ज्ञापन सौंपने का फैसला लिया है. किसानों की मांग है कि केंद्र सरकार तीनों कृषि कानूनों को रद्द करे और एमएसपी पर कानून बनाए. हालांकि, सरकार इन कानूनों को तकरीबन डेढ़ साल तक टालने का ऑफर दे चुकी है.

 

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