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केंद्र सरकार की ओर से लाए गए तीनों कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन बीते 208 दिनों से जारी है. किसान अब भी दिल्ली के टीकरी और सिंघू बॉर्डर पर डटे हुए हैं. 26 जनवरी को जब किसान आंदोलन हिंसक हुआ, फिर लगा कि आंदोलन अब खत्म कर दिया जाएगा, लेकिन 7 महीने होने वाले हैं, आंदोलन अब तक चल रहा है.
सिंघू बॉर्डर से लेकर टिकरी बॉर्डर तक किसान डटे हुए हैं. वहीं दूसरी तरफ से किसानों ने टिकरी बॉर्डर पर सड़क के ऊपर स्थायी कंस्ट्रक्शन भी बना लिए हैं. रोहतक जाने वाली सड़क पर किसानों के पक्के घर नजर आ रहे हैं. इन घरों में एसी, कूलर, फ्रिज और टीवी जैसी सुविधाएं मौजूद हैं.
किसान एसी का टेंपरेचर 18 डिग्री तक रखते हैं. लग्जरी स्टाइल में जी रहे किसान, तीनों कानूनों को वापस लेने की मांगों पर डटे हैं. आजतक की टीम ने किसान आंदोलन की इस हाइटेक व्यवस्था की पड़ताल की है. टिकरी बॉर्डर मेट्रो स्टेशन से आजतक की टीम करीब 7 किलोमीटर की दूरी तय करके सड़के उस इलाके में पहुंची, जहां किसानों ने अपने लिए पक्के घर तैयार किए हैं.
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स्थानीय लोगों का हुआ जीना दूभर
जब इस आंदोलन की शुरुआत हुई थी तब संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर हजारों किसान दिल्ली की तरफ ट्रैक्टर-ट्राली और बसों के जरिए पहुंच गए थे. अब दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों ने टेंट छोड़कर परमानेंट घर बना लिया है. जो स्थानीय लोग इस इलाके में रहते हैं, उनका कहना है कि जीवन दूभर हो गया है.
पंजाब के फिरजोपुर से आए एक किसान ने भी अपना घर सड़क पर पक्का बना रखा है. आजतक की टीम ने जब इस घर के बारे में पूछा तो इन्होंने बताया कि ऐसे कई पक्के घर इस रोड पर बने हुए हैं. जिन लोगो ने अपना सारी व्यवस्था की है, उन्हें ऐसे घर बनाने के लिए पंजाब के गावों से मदद मिल रही है.