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नए कानून के तहत दिल्ली में दर्ज हुआ पहला केस, जानें अब से किस तरह लिखी जाएगी FIR

आज से देश में नए कानून लागू हो गए हैं. इसके साथ ही दिल्ली के कमला मार्केट इलाके में नए कानून के तहत पहला केस दर्ज कर लिया गया है, जिसमें खुद पुलिस थाने के सब इंस्पेक्टर ने आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है.

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देशभर में आज से लागू हो चुके नए कानून के तहत दिल्ली में पहला केस दर्ज कर लिया गया है. यह केस दिल्ली के कमला मार्केट इलाके का है, जिसमें खुद पुलिस थाने के सब इंस्पेक्टर ने आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है.

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दर्ज FIR के मुताबिक SI कार्तिक मीणा ने यह शिकायत दर्ज कराई है. बताया जा रहा है कि सब इंस्पेक्टर जब क्षेत्र में पेट्रोलिंग कर रहे थे, तब वह नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के फुट ब्रिज के पास डीलक्स शौचालय के नजदीक पहुंचे. यहां पर एक शख्स अपनी रेहड़ी लगाकर आम रास्ते पर पानी, बिड़ी और सिगरेट पहुंच रहा था. इससे लोगों को वहां से गुजरने में परेशानी हो रही थी.

मजबूरी बताकर चला गया रेहड़ी मालिक

इसे देखते हुए SI ने रेहड़ी वाले को रास्ते से रेहड़ी हटाने के लिए कहा. लेकिन रेहड़ी मालिक अपनी मजबूरी बताकर वहां से चले गए. इसके बाद सब इंस्पेक्टर ने रेहड़ी वाले के खिलाफ पुलिस थाने में केस दर्ज कराया.

अब से इस तरह लिखी जाएगी नई FIR

बता दें कि अब से एफआईआर अलग तरीके से लिखी जाएगी. धारा के साथ बीएनएस के तहत लिखना होगा. आज तक के पास नए कानून के तहत दिल्ली में दर्ज पहली एफआईआर की प्रति उपलब्ध है. भारतीय न्याय संहिता की धारा के तहत एफआईआर दर्ज रात 12 बजे के बाद सभी मामलों की एफआईआर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएन एन एस) की धारा 173 के तहत दर्ज कर ली गई.  दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 154 के अंतर्गत नहीं.

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25 हजार पुलिसकर्मियों को मिली ट्रेनिंग

जानकारी के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने नए कानून के तहत एफआईआर दर्ज करने और जांच करने के लिए 25 हजार पुलिस कर्मियों को ट्रेनिंग दिलवाई है.

नए कानून में और क्या नियम?

नए कानून के मुताबिक FIR के 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करनी होगी. चार्जशीट दाखिल होने के 60 दिनों के भीतर कोर्ट को आरोप तय करने होंगे. इसके साथ ही मामले की सुनवाई पूरी होने के 30 दिनों के भीतर जजमेंट देना होगा. जजमेंट दिए जाने के बाद 7 दिनों के भीतर उसकी कॉपी मुहैया करानी होगी. पुलिस को हिरासत में लिए गए शख्स के बारे में उसके परिवार को लिखित में बताना होगा. ऑफलाइन, ऑनलाइन भी सूचना देनी होगी. 7 साल या उससे ज्यादा सजा वाले मामले में विक्टिम को सुने बिना वापस नहीं किया जाएगा. थाने में कोई महिला सिपाही भी है तो उसके सामने पीड़िता के बयान दर्ज कर पुलिस को कानूनी कार्रवाई शुरू करनी होगी.

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