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देश की राजधानी में पहला वैक्सीनेशन सेंटर साउथ दिल्ली के श्रीनिवासपुरी इलाके में तैयार कर लिया गया है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइंस के मुताबिक दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के मैटरनिटी होम में वैक्सीनेशन साइट बनाई गई है. आपको बता दें कि पूरी दिल्ली में 1000 से ज़्यादा वैक्सीनेशन साइट बनाई जा रही हैं. 'आजतक' की टीम ने वैक्सीनेशन साइट का जायजा लिया है, कि यहां वैक्सीन लगाने की पूरी प्रक्रिया कैसी होगी.
वैक्सीनेशन साइट पर टीकाकरण कार्यक्रम सुबह 9:00 से शाम 5:00 बजे तक चलेगा. लाभार्थी यानी जिन को टीका लगाया जाना निश्चित किया गया है या जिनका सरकार द्वारा जारी लिस्ट में नाम है, उनको अलग अलग समय पर वैक्सीनेशन साइट पर बुलाया जाएगा ताकि भीड़ न हो. टीकाकरण के लिए वैक्सीनेशन साइट पर अपना आईडी कार्ड ले जाना अनिवार्य होगा.
यहां वैक्सीनेशन साइट में तीन कमरे बनाए गए हैं...
1. वेटिंग रूम या एरिया
2. वैक्सीनेशन रूम
3. ऑब्जर्वेशन रूम
एक वैक्सीनेशन साइट पर ट्रेनिंग पा चुके 5 सदस्यों की टीम तैनात होगी :
1. वैक्सीनेटर ऑफिसर- डॉक्टर/नर्स/फार्मासिस्ट
2. वैक्सीनेशन ऑफिसर 1 - ( पुलिस होमगार्ड या सिविल डिफेंस का व्यक्ति) जो लाभार्थी के रजिस्ट्रेशन की स्थिति देखेगा
3. वैक्सीनेशन ऑफिसर 2- यह दस्तावेज की जांच को प्रमाणित करेगा
4. वैक्सीनेशन ऑफिसर 3 और 4 - यह दो सपोर्ट स्टाफ भीड़ आदि का प्रबंधन करेंगे
वेटिंग एरिया में वैक्सीन लगवाने वाले लोगों को प्री-रजिस्ट्रेशन और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया से गुजरना होगा. वैक्सीनेशन साइट पर रजिस्ट्रेशन और आईडी के मिलान के लिए अलग अलग डेस्क के साथ ऑफिसर तैनात किए गए हैं. रजिस्ट्रेशन डेस्क के ठीक पीछे वैक्सीनेशन रूम तैयार किया गया है जहां वैक्सीनेटर ऑफिसर वैक्सीन लगाएंगे. वैक्सीन के स्टोरेज के लिये डीप फ्रीजर की व्यवस्था भी इस रूम में की गई है.
वैक्सीन लगने के बाद साइट में बने ऑब्जर्वेशन रूम में जाना होगा. ऑब्जर्वेशन रूम यानी वह जगह जहां पर टीका लगवाने के बाद लाभार्थी को 30 मिनट इंतजार करना होगा. इस कमरे में पीने के पानी और टॉयलेट की सुविधा रखने के निर्देश दिए गए हैं. अगर किसी को कोई दिक्कत होती है तो उसके लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था भी की जायेगी. टीका लगने के बाद 30 मिनट का इंतजार इसलिए करना जरूरी है ताकि यह देखा जा सके कि कहीं कोई प्रतिकूल प्रभाव तो नहीं पड़ रहा.
श्रीनिवासपुरी के निगम पार्षद राजपाल सिंह की देखरेख में यह वैक्सीनेशन सेंटर तैयार हुआ है. राजपाल सिंह ने 'आजतक' से कहा कि "हमें खुशी है कि हमें दिल्ली का पहला वैक्सीनेशन सेंटर बनाने का मौका मिला. हमने इसे मॉडल वैक्सीनेशन सेंटर के रूप में विकसित किया है और अन्य जगहों पर भी अब इस तरह के सेंटर बनाए जाएंगे. राजपाल सिंह ने बताया कि इस सेंटर में वैक्सीनेशन को लेकर तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं और अब बस वैक्सीन का इंतजार है. वैक्सीन मिलने के 10 मिनट के भीतर हम इस सेंटर को ऑपरेशनल कर देंगे."
हेल्थ केयर वर्कर और फ्रंट लाइन वर्कर के अलावा पहले फेज़ में वैक्सीन पाने वाले सीनियर सिटीजन को लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में तैयार की गई वोटर लिस्ट के आधार पर पहचान की जाएगी. Co-WIN नाम के डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए लाभार्थियों को ट्रैक किया जाएगा. इस प्लेटफार्म पर सभी जानकारी रियल टाइम में अपडेट की जाएंगी. वैक्सीन लगवाने से पहले इसी डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए लाभार्थियों के रजिस्ट्रेशन को पुख़्ता किया जाएगा.
वैक्सीनशन साइट पर केवल उन्हीं लाभार्थियों को टीका लगाया जाएगा जो प्राथमिकता के आधार पर पहले ही रजिस्टर्ड हो चुके हैं. ऐसा नहीं होगा कि कोई व्यक्ति तुरंत वैक्सीनेशन साइट पर पहुंचकर अपना रजिस्ट्रेशन कराए और टीका लगवा लें. एक वैक्सीनशन साइट पर एक सत्र (एक दिन) में अधिकतम 100 लाभार्थियों को वैक्सीन देने की उम्मीद है.
आपको बता दें कि दिल्ली में तीन श्रेणियों को सबसे पहले वैक्सीन दी जाएगी. इनमे 3 लाख हेल्थ-केयर वर्कर, 6 लाख फ्रंट-लाइन वर्कर जैसे पुलिस, सिविल डिफेंस और ऐसे लोग जिनकी उम्र 50 साल से ज्यादा है, शामिल हैं. दिल्ली में कुल 51 लाख लोगों को पहले फेज में वैक्सीन लगाई जाएगी. पहले फेज़ के मद्देनजर 1 करोड़ 2 लाख वैक्सीन की ज़रूरत होगी.
साथ ही, दिल्ली में लगभग 609 कोल्ड चेन पॉइंट्स को चिन्हित किया गया है. कोल्ड चेन पॉइंट्स बड़े अस्पतालों जैसे राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, लोकनायक अस्पताल, कस्तूरबा अस्पताल, बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल, जीटीबी अस्पताल से लेकर अर्बन पब्लिक हेल्थ सेंटर और मोहल्ला क्लीनिक मौजूद रहेंगे.
वैक्सीनेशन प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए राजधानी में लगभग 3,500 स्वास्थ्य कर्मचारियों को चिन्हित किया गया है. इनमें से 1,800 कर्मचारी कोल्ड चेन पॉइंट्स पर तैनात रहेंगे. हर कोल्ड स्टोरेज फैसिलिटी पर टीका लगाने के लिए स्वास्थ्य कर्मी भी तैनात होंगे. सभी 3,500 स्वास्थ्य कर्मियों में से करीब 600 स्वास्थ्यकर्मी प्राइवेट सेक्टर से हैं.
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