scorecardresearch
 

दिल्ली में लागू होगा गुजरात वाला कानून, पुलिस को मिलेगी और ज्यादा ताकत, LG ने गृह मंत्री अमित शाह को भेजा प्रस्ताव

उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने गुजरात प्रिवेंशन ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज एक्ट (PASAA) 1985 को अपनी मंजूरी दे दी है और गृह मंत्रालय को भेज दिया है. दिल्ली में कानून व्यवस्था के रखरखाव के लिए, असामाजिक और खतरनाक गतिविधियों को रोकने के लिए, नशीली दवाओं के अपराध को रोकने के लिए, अनैतिक यातायात अपराधियों और संपत्ति हड़पने वालों पर नकेल कसने के लिए ही यह कानून मददगार साबित होगा.  

Advertisement
X
LG ने दी मंजूरी
LG ने दी मंजूरी

दिल्ली में अब असामाजिक गतिविधियों को रोकने के लिए गुजरात का कानून लागू करने की तैयारी है. उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने गुजरात प्रिवेंशन ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज एक्ट (PASAA) 1985 को अपनी मंजूरी दे दी है और गृह मंत्रालय को भेज दिया है. दिल्ली में कानून व्यवस्था के रखरखाव के लिए, असामाजिक और खतरनाक गतिविधियों को रोकने के लिए, नशीली दवाओं के अपराध को रोकने के लिए, अनैतिक यातायात अपराधियों और संपत्ति हड़पने वालों पर नकेल कसने के लिए ही यह कानून मददगार साबित होगा.  

Advertisement

दिल्ली के गृह विभाग ने 27 जून को गुजरात कानून को दिल्ली के एनसीटी तक विस्तारित करने के लिए केंद्र शासित प्रदेश (कानून) अधिनियम की धारा 2 के तहत अधिसूचना जारी करने के लिए उपराज्यपाल को प्रस्ताव पेश किया था. अब उपराज्यपाल ने इसे मंजूरी देते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय को दे दिया है. 

तेलंगाना से की गई थी तुलना

दिल्ली में गुजरात के कानून की सिफारिश करने से पहले तेलंगाना के एक ऐसे ही कानून (तेलंगाना बूट लेगर्स, संपत्ति अपराधियों की खतरनाक गतिविधियों की रोकथाम ... आदि अधिनियम, 1986) की भी जांच की गई थी. हालांकि जांच में यह पाया गया कि गुजरात का कानून ज्यादा बेहतर है. इसके अलावा, उपराज्यपाल इस प्रस्ताव पर भी सहमत हुए थे कि गुजरात कानून को राष्ट्रीय राजधानी में इसके विस्तार पर विचार करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जा सकता है. 

Advertisement

पुलिस ने जताई थी जरूरत

बताते चलें कि दिल्ली पुलिस ने 14 फरवरी को एक पत्र लिखकर यह गुजारिश की थी कि दिल्ली के लिए भी गुजरात अधिनियम के प्रावधानों की जांच की जाए. इस कानून के तहत सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए खतरनाक अपराधियों, अवैध शराब बेचने वालों, नशे के अपराधियों, ट्रैफिक कानून को तोड़ने वाले और संपत्ति हड़पने वालों को ऐहतियातन हिरासत में लेने का प्रावधान है. 

गुजरात का पीएएसए अधिनियम रहा चर्चा में

गौरतलब है कि गुजरात का पीएएसए अधिनियम चर्चाओं का विषय रहा है. राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने इस कानून का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए गुजरात सरकार की कई बार आलोचना की है. कोर्ट की ओर से भी इस एक्ट को लेकर फटकार लगाई जा चुकी है. ये कानून दो साल पहले भी तब चर्चा में रहा था जब एक डॉक्टर को इस कानून के तहत हिरासत में लिया गया था.

अगर यह कानून पारित हो जाता है, तो दिल्ली पुलिस को अपराधियों से निपटने के लिए और ज्यादा ताकत मिलेगी. साथ ही उम्मीद की जा रही है कि ऐसे में चेन स्नैचिंग, बूटलेगिंग, नशीली दवाओं की तस्करी और तस्करी आदि जैसे अपराधों को रोकने में मदद मिलेगी. 

Advertisement
Advertisement