दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को 1984 के सिख दंगे से जुड़े पांच मामलों को फिर से खोल दिया है, जिन्हें 1986 में बंद कर दिया गया था. हाई कोर्ट ने तीन वकीलों को 'न्याय मित्र' नियुक्त किया है और दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि शिकायत करने वालों का पता लगाए. पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वह नोटिस देकर शिकायत करने वालों को 20 अप्रैल तक कोर्ट के समक्ष पेश होने को कहे.
ये पांचों मामले दिल्ली कैंट और सुल्तानपुर इलाकों में हुई मौतों से जुड़े हैं. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से कहा था कि वह 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले से जुड़े 199 मामलों से संबंधित फाइलें जमा करें, जिन्हें विशेष जांच दल ने बंद करने को कहा था.
सज्जन कुमार की बढ़ेगी मुश्िकल
इन दंगों में आरोपी कांग्रेस नेता सज्जन कुमार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रहीं हैं. इन सभी मामलों को 1986 में बंद कर दिया गया था. इनमें सज्जन, बलवान खोखर, महेंद्र यादव, कृष्ण खोखर आरोपी हैं.
ये याचिका सीबीआइ की तरफ से दायर की गयी थी. याचिका में 1986 की चार्जशीट 10, 11, 31, 32 और 33 में सज्जन कुमार और बाकी के आरोपियों को बरी करने को चुनौती दी गई थी. हाइकोर्ट ने इन पांच मामलों की जांच में की गई कर्मियों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा कि इन मामलों में प्रमुख चश्मदीद गवाहों से पूछताछ ही नहीं की गई है. यह बड़ी हास्यास्प्रद बात है. हाईकोर्ट ने कहा कि मामलों को बड़ी जल्दी में बंद किया गया, जिससे ऐसा लगता है कि इनमें सही जांच और ट्रायल हुआ ही नहीं. ऐसे में सभी पांच मामलों में दोबारा जांच करने का आदेश दिया जाता है.
इससे पहले हाइकोर्ट ने दिल्ली पुलिस और सीबीआई से इन मामलों के रिकॉर्ड खोजने का निर्देश दिया था, लेकिन जब रिकॉर्ड नहीं मिला तो हाइकोर्ट ने इन मामलों की फिर से जांच करने का आदेश दिया है. इसके अलावा हाईकोर्ट ने सज्जन कुमार समेत बाकी के सभी आरोपियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. हाइकोर्ट ने आरोपियों से पूछा है कि वह बताएं की इस मामले में दोबारा जांच क्यों न शुरू की जाए. सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकीलों ने मामले की फिर जांच करने का विरोध किया. उनका तर्क था कि हाइकोर्ट इस मामले में स्वत: संज्ञान लेकर जांच के आदेश नहीं दे सकती.
84 के दंगों में मारे गए थे 3 हजार से ज्यादा लोग
31 अक्टूबर, 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में दंगे भड़के थे, जिनमें 3 हजार से ज्यादा सिख मारे गए थे. मोदी सरकार के आने के बाद से सिख 84 दंगों से जुड़े केसों की फाइलें फिर से खोलने की मांग
कर रहे थे. सिर्फ दिल्ली में ही इन दंगों को दौरान 2,733 लोग मारे गए थे, जिनमें से ज्यादातर सिख थे.दिल्ली में सिख दंगों से जुड़े 237 केस पीड़ितों के मौजूद न होने और सबूतों के अभाव में बंद कर दिए थे.