केरल में निपाह, गुजरात में चांदीपुरा और महाराष्ट्र में जीका वायरस का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है. गुजरात में चांदीपुरा वायरस से 27 लोगों की मौत हो गई है तो केरल में निपाह वायरस की चपेट में आने से 14 वर्षीय लड़के की मौत हो गई, जबकि महाराष्ट्र में जीका वायरस के 28 मामले मिले हैं. तीन राज्यों में तीन अलग-अलग वायरस के अटैक से केंद्र हेल्थ एजेंसियां एक्शन में आ गई हैं. केंद्र सरकार ने राज्य में मामले की जांच करने, महामारी पर लगाम लगाने और तकनीकी सहायता देने में केरल, महाराष्ट्र और गुजरात की मदद के लिए एक बहु-सदस्यीय प्रतिक्रिया टीम तैनात करने का फैसला लिया है.
रविवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि केरल में 14 वर्षीय लड़के की मौत हुई है. उसे तीव्र एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम था और उसे कोझिकोड के एक अस्पताल में ट्रांसफर करने से पहले पेरिंथलमन्ना में एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था. पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी को भेजे गए सैंपल में निपाह वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्य को सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को तुरंत लागू करने की सलाह दी है.
मृतक के संपर्क में आए लोगों की पहचान और पड़ोस में रहने वाले लोगों की टेस्टिंग के भी निर्देश दिए गए हैं. इन सभी लोगों का पता लगाने के बाद उन्हें 12 दिन क्वारंटाइन में रखने का भी आदेश दिया है. साथ ही स्वास्थ्य मंत्रालय के वन हेल्थ मिशन के तहत बहु-सदस्यीय प्रतिक्रिया टीम को मामले की जांच करने और महामारी विज्ञान संबंधों की पहचान करने और तकनीकी सहायता प्रदान करने में राज्य का समर्थन करने के लिए तैनात किया जाएगा.
यह भी पढ़ें: निपाह वायरस की रोकथाम के लिए केरल में टीम तैनात करेगा केंद्र, 14 वर्षीय युवक की गई जान
वायरस की हाई-रिस्क कैटेगरी में 101 लोग
केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा कि मृतक लड़के के छह दोस्तों और 68 वर्षीय एक व्यक्ति के नमूने नेगेटिव पाए गए. मंत्री ने कहा कि छह दोस्त लड़के के सीधे संपर्क में थे, लेकिन 68 वर्षीय व्यक्ति सीधे संपर्क में नहीं था. उनका ब्लड सैंपल इसलिए कराया गया था, क्योंकि उन्हें बुखार था. फिलहाल 14 वर्षीय लड़के के संपर्क में आए 330 लोग शामिल हैं, जिनमें से 68 स्वास्थ्य कर्मी हैं. साथ ही हाई-रिस्क कैटेगरी में 101 लोगों रखा गया है. इनमें से सात को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. मृतक लड़के के परिवार में किसी के अंदर वायरस के लक्षण नहीं मिले हैं.
गुजरात में पैर पसार रहा है चांदीपुरा वायरस
वहीं, गुजरात में चांदीपुरा वायरस तेजी से पैर पसार रहा है. अब तक इसके 71 संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जबकि 27 लोगों की मौत हो चुकी है. राज्य के 23 जिलों में इस वायरस के संदिग्ध केस मिले हैं. इसमें साबरकांठा में 8, अरावली में 4, महिसागर में 2, खेड़ा में 5, मेहसाणा में 4, राजकोट में 2, सुरेंद्रनगर में 2, अहमदाबाद शहर में 4, गांधीनगर में 5, पंचमहल में 11, जामनगर में 5, मोरबी में 4, गांधीनगर शहर में 2, छोटा उदयपुर में 2, दाहोद में 2, वडोदरा में 1, नर्मदा में 1, बनासकांठा में 02, वडोदरा शहर में 01, भावनगर में 1, देवभूमि द्वारका में 1, राजकोट निगम में 1, कच्छ में 1, साबरकांठा में 1, अरावली में 2, मेहसाणा में 2, गांधीनगर में 1, पंचमहल में 1, मोरबी में 1 और वडोदरा में 1 मरीज चांदीपुरा वायरस से संक्रमित पाया गया है. गुजरात के 71 संदिग्ध मामलों में 27 मरीजों की मौत हो चुकी है. इसमें साबरकांठा में 2, अरावली में 3, महिसागर में 1, मेहसाणा में 2, राजकोट में 2, सुरेंद्रनगर में 01, अहमदाबाद शहर में 3, गांधीनगर में 1, पंचमहल में 4, मोरबी में 3, गांधीनगर निगम में 1, दाहोद में 2, वडोदरा में 1 और देवभूमि द्वारका में बी 1 मरीज की मौत हुई है. गुजरात में 41 मरीज भर्ती हैं और 3 मरीज अब तक ठीक हो चुके हैं. इस वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने कुल 17248 घरों में 121826 व्यक्तियों की जांच की है.
विशेष रूप से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने विशेषज्ञों के साथ शुक्रवार को गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश में चांदीपुरा वायरस के मामलों और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के मामलों की समीक्षा की है.
यह भी पढ़ें: गुजरात में चांदीपुरा वायरस का कहर, 27 मरीजों की मौत, जानें- कहां कितने संदिग्ध मिले
क्या हैं चांदीपुरा वायरस के लक्षण
चांदीपुरा वायरस होने से रोगी को बुखार की शिकायत होती है. इसमें फ्लू जैसे ही लक्षण होते हैं और तेज एन्सेफलाइटिस होती है. एन्सेफलाइटिस एक ऐसी बीमारी है, जिससे दिमाग में सूजन की शिकायत होती है.
मुंबई में मिले जीका वायरस के 34 केस
महाराष्ट्र में अब तक जीका के 34 मामले सामने आए हैं, जिसमें पुणे जिला सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां 19 जुलाई तक 28 मामले सामने आए हैं. राज्य सरकार सक्रिय रूप से इस वायरस के प्रकोप को रोकने की कोशिश कर रही है.
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि वायरस से प्रभावित जिलों में हर 3 से 5 किलोमीटर पर केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं. जो क्षेत्रों में सर्वे करेंगे और बुखार के मामले सामने आने पर तुरंत पहचान के लिए ब्लड सैंपल लेंगे. गर्भवती महिलाओं और माताओं के भी ब्लड सैंपल लेकर जीका वायरस के लिए टेस्ट किया जा रहा है, क्योंकि गर्भावस्था के दौरान जीका वायरस संक्रमण भ्रूण और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है.
जीका वायरस के लक्षण बेहद आम हैं. इनमें शरीर पर लाल चकत्ते पड़ना, बुखार, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द और सिर में दर्द शामिल है. जीका वायरस से संक्रमित ज्यादातर लोगों में इसके लक्षण नहीं मिलते.
यह भी पढ़ें: जीका वायरस को लेकर केंद्र ने सभी राज्यों को जारी की एडवाइजरी, इन बातों का रखना होगा ध्यान
क्या है जीका वायरस
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, जीका वायरस एडीज मच्छर के काटने से फैलता है. एडीज मच्छरों के काटने से ही डेंगू, चिकनगुनिया और येलो फीवर भी फैलता है. ये तीनों वायरस लगभग एक जैसे ही हैं. इन तीनों वायरस के फैलने की शुरुआत पश्चिम, मध्य अफ्रीका और दक्षिण पूर्व एशिया से हुई थी. जीका वायरस गर्भवती महिला से गर्भ मे पल रहे बच्चे में फैलता है.
क्या है निपाह वायरस
वायरस रिपोर्ट्स की मानें तो निपाह संक्रमण का पहला मामला 1998-99 में सामने आया था. यह मलेशिया के कम्पंग सुंगाई निपाह नामक जगह पर सबसे पहले देखा गया था. यहां इस संक्रमण की चपेट में 250 से ज्यादा लोग आए थे. निपाह संक्रमण मलेशिया में कम्पंग सुंगाई निपाह नाम की जगह पर पहली बार देखा गया था और इसी वजह से इसका नाम निपाह पड़ा. चमगादड़ों को निपाह वायरस के प्रसार का मुख्य कारक माना जाता है. चमगादड़ों द्वारा दूषित फलों या अन्य भोजन के माध्यम से ये इंसानों में फैल सकता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, फलों-सब्जियों को खाने से पहले उसे अच्छी तरह से साफ करें. पक्षियों द्वारा कटा हुआ फल न खाएं.
क्या है चांदीपुरा वायरस
साल 1966 में पहली महाराष्ट्र में इससे जुड़ा केस रिपोर्ट किया गया था. नागपुर के चांदीपुर में इस वायरस की पहचान हुई थी, इसलिए इसका नाम चांदीपुरा वायरस पड़ गया. इसके बाद इस वायरस को साल 2004 से 2006 और 2019 में आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में रिपोर्ट किया गया. बता दें कि चांदीपुरा वायरस एक RNA वायरस है, जो सबसे ज्यादा मादा फ्लेबोटोमाइन मक्खी से फैलता है. इसके फैलने के पीछे मच्छर में पाए जाने वाले एडीज जिम्मेदार हैं.