चुनावी राज्यों में होने वाली रैलियों के संबंध में स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को मीडिया ब्रीफ्रिंग में कहा कि चुनाव से संबंधित मामलों पर चुनाव आयोग फैसला लेता है. वहीं नीति आयोग के सदस्य (हेल्थ) डॉक्टर वीके पॉल ने कहा कि हमें कम्यूनिटी स्प्रेड को रोकना है. उन्होंने भी कहा कि चुनाव आयोग रैलियों के संबंध में फैसला लेती है. मंत्रालय ने आजतक के इस सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया कि क्या हो रही रैलियों के संबंध में स्वास्थ्य मंत्रालय स्वत: संज्ञान ले सकता है? पॉल ने कहा कि हमने दिशा-निर्देश जारी किए हैं, हम सभी से इसे पालन करने का अनुरोध करते हैं.
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि जिन कोरोना के मरीजों में सीडीसी के दिशा निर्देशों के मुताबिक, कोरोना के लक्षण नहीं हैं, उन रोगियों के लिए आइसोलेशन की अवधि को तय करने की योजना नहीं है. मंत्रालय ने उन कोरोना मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने को भी उचित ठहराया जिनमें कम लक्षण हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि हम इस समय सतर्कता बरत रहे हैं. हम कोरोना मरीज की पहचान करते हैं फिर उसके कॉन्टैक्ट को ट्रेस करते हैं.
बता दें कि गुरुवार को चुनाव आयोग ने लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान अगले साल यूपी में होने वाले विधानसभा चुनावों पर बात की गई. आयोग ने बताया कि यूपी के सभी दलों ने उनसे समय पर चुनाव कराने की मांग की है. अब साफ है कि चुनाव की तारीखों का ऐलान 5 जनवरी के बाद होगा.