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के कविता की जमानत याचिका पर कल फैसला सुनाएगा हाई कोर्ट, अदालत ने सुरक्षित रख लिया था फैसला

के कविता को आबकारी नीति मामले और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग में उनकी कथित भूमिका के लिए सबसे पहले ईडी ने गिरफ्तार किया था. अदालत के आदेश पर उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया था. उधर, शराब नीति मामले की जांच कर रही सीबीआई ने उन्हें उस समय गिरफ्तार किया जब वह जेल में थीं.

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बीआरएस नेता  के. कविता. (फाइल फोटो)
बीआरएस नेता के. कविता. (फाइल फोटो)

दिल्ली की विवादास्पद शराब नीति और इससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों वाले कथित घोटाले में गिरफ्तार भारत राष्ट्र समिति यानी BRS नेता के कविता की जमानत याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट सोमवार को फैसला सुनाएगा.

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ईडी और सीबीआई दोनों मामले में दाखिल जमानत याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की एकल जज पीठ फैसला सुनाएगी. जस्टिस शर्मा ने 28 मई को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था.

'घोटाले में निभाई अहम भूमिका'

के कविता को आबकारी नीति मामले और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग में उनकी कथित भूमिका के लिए सबसे पहले ईडी ने गिरफ्तार किया था. अदालत के आदेश पर उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया था. उधर, शराब नीति मामले की जांच कर रही सीबीआई ने उन्हें उस समय गिरफ्तार किया जब वह जेल में थीं.

हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीबीआई और ईडी ने उनकी जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि उन्होंने 'घोटाले' के पीछे की साजिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. बीआरएस में सक्रिय नेता और तेलंगाना विधान परिषद की सदस्य होने के नाते वह 'कमजोर' महिलाओं के साथ समानता की मांग नहीं कर सकती हैं. 

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'के कविता में गवाहों को प्रभावित करने की क्षमता'

उनके रसूखों और पद स्थिति के चलते जमानत पर बाहर रहते हुए उनमें सबूतों से छेड़छाड़ करने और गवाहों को प्रभावित करने की क्षमता है. एजेंसी ने तर्क दिया कि तेलंगाना की विधायक 'अत्यधिक प्रभावशाली' व्यक्ति हैं. उन पर गंभीर आर्थिक अपराध करने के आरोप हैं.

क्या हैं के कविता पर आरोप?

कविता के पिता बीआरएस अध्यक्ष और तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव हैं. कविता 15 मार्च को ईडी के हाथों हैदराबाद में अपने पिता चंद्रशेखर राव के आवास से गिरफ्तार की गई थीं. उन पर साजिश के अहम किरदार 'साउथ ग्रुप' का हिस्सा होने का आरोप है. 

जांच एजेंसी का आरोप है कि इस लॉबी ने कथित तौर पर अपनी व्यावसायिक जरूरतों के अनुरूप दिल्ली सरकार की शराब नीति में बदलाव करने के लिए दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार को 100 करोड़ रुपए का भुगतान किया था.

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