आईआईटी रूड़की के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने दिल्ली में यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्रों में तेजी से हो रहे निमार्ण और जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़ के खतरों पर चिंता जताई है. 2023 की बाढ़ का विश्लेषण करने पर, उन्होंने पाया कि पिछले तीन दशकों में यमुना नदी के आसपास स्थायी संचरनाओं के निर्माण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, खासकर शास्त्री पार्क, मजनू का टीला और अक्षरधाम जैसे क्षेत्रों में.
तेजी से होते शहरीकरण के कारण ग्रीन बेल्ट कम हुए हैं, जिससे शहर में भारी वर्षा और उसके बाद बाढ़ की आशंका बढ़ गई है. वैज्ञानिकों ने फ्लड मैनेजमेंट के लिए रणनीति बनाने और अर्बन प्लानिंग की आवश्यकता पर जो दिया है. इस जोखिम को कम करने के लिए उन्होंने जो सुझाव दिए हैं, उसके मुताबिक मौजूदा ड्रेनेज सिस्टम को नए सिरे से विकसित करना, ऐसी टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को बढ़ावा देना जिससे पर्यावरण पर कम प्रभाव पड़े, हाई रिस्क वाले फ्लड प्लेंस में में निर्माण कार्यों को प्रतिबंधित करना, बाढ़ के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम तैयार करना और प्रभावी आपदा प्रबंधन के लिए इंटर-डिपार्टमेंटल सहयोग को बढ़ावा देना शामिल है.
दिल्ली में आई 2023 की बाढ़ का विश्लेषण करने पर पता चला है कि इसके लिए न केवल वेटर पैटर्न में परिवर्तन, बल्कि अनियंत्रित शहरीकरण और इनका पर्यावरण पर पड़ने वाला विपरीत प्रभाव भी जिम्मेदार है. शोधकर्ताओं ने इसे समय रहते नियंत्रित करने के लिए पॉलिसी बनाने पर जोर दिया है. उन्होंने नीति निर्माताओं को अनियंत्रित शहरीकरण के दीर्घकालिक प्रभावों को पहचानने और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न होने वाले खतरों से शहर को सुरक्षित रखने के लिए टिकाऊ रणनीति लागू करने का आह्वान किया है.
राजधानी दिल्ली में 9 जुलाई 2023 को 153 मिलीमीटर (6.0 इंच) से अधिक बारिश हुई, जो 40 से अधिक वर्षों में जुलाई महीने में एक दिन में हुई सबसे अधिक वर्षा थी. यमुना नदी का जल स्तर 45 वर्षों के उच्चतम बिंदु पर पहुंच गया. इसकी वजह से निचले इलाके जलमग्न हो गए, यहां तक कि मुख्यमंत्री आवास के बाहर की सड़क और कनॉट प्लेस की ओर जाने वाली प्रमुख सड़क भी पानी में डूब गई. लाल किले के चारों ओर बाढ़ का पानी भर गया. हजारों लोगों को अपना घर बार छोड़कर दिल्ली सरकार के बाढ़ राहत शिविरों में रुकने के लिए मजबूर होना पड़ा.