एयरपोर्ट मेट्रो लाइन बंद किए जाने पर बनाई गई जांच समिति ने डीएमआरसी के आला अधिकारियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है. दो सदस्यों की जांच समिति ने ये रिपोर्ट शहरी विकास मंत्रालय के सचिव को सौंप दी है.
एयरपोर्ट मेट्रो लाइन बंद किए जाने पर जांच समिति की रिपोर्ट आ गई है, जिसके मुताबिक एयरपोर्ट लाइन मेट्रो बनने पर मुआयने किए बगैर ही कम्प्लीशन सर्टिफिकेट दे दिया गया था. जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके लिए ठेकेदार कंपनियों के साथ-साथ डीएमआरसी भी जिम्मेदार है.
डीएमआरसी पर आरोप है कि उसने पूरा मुआयना किए बगैर ठेकेदार कंपनियों को कम्प्लीशन सर्टिफिकेट दे दिया. यही नहीं बाद में डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड के दौरान भी लापरवाही बरती गई और कोई मुआयना नहीं किया गया.
गौरतलब है कि पिछले साल 8 जुलाई को सिविल स्ट्रक्चर में गड़बड़ी और तकनीकी खामी के चलते सुरक्षा कारणों से इस रूट को करीब 6 महीने के लिए बंद कर दिया गया था. मरम्मत के बाद 22 जनवरी 2013 को एयरपोर्ट लाइन दोबारा चालू की गई.
जांच रिपोर्ट में डिजाइन में कमी के लिए ठेकेदार कंपनी के साथ-साथ डीएमआरसी को भी जिम्मेदार ठहराया गया है. ठेकेदार कंपनियों के तौर पर मेसर्स सिस्त्रा और मेसर्स आईजेएमआईजेएमआईआई का नाम दिया गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक इन कंपनियों से डिजाइन के लिए सही एक्सपर्ट की मदद नहीं ली, जिसके चलते फूलप्रूफ काम सुनिश्चित नहीं किया जा सका. कंपनियों ने जिन एक्सपर्ट्स की मदद ली, उनका अंदाजा और डिजाइन सही नहीं था. सबसे बड़ी बात यह है कि डीएमआरसी भी इस रिपोर्ट में सवालों के कठघरे में है.