जब अलका लांबा को दिल्ली विधानसभा के चुनावों में कांग्रेस का टिकट नहीं मिला, तो उन्होंने अपनी तकलीफ फेसबुक पर भी जाहिर की. मगर यह भी लिखा कि देश, मां और पार्टी को छोड़ा नहीं जाता. लेकिन आज अलका ने कांग्रेस छोड़ दी और उसी आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया, जिसकी वह हाल तक मुखालफत करती थीं.
अलका का कहना है कि वह पिछले तीन साल से राहुल गांधी से मिलकर अपनी बात रखने की कोशिश कर रही थीं, मगर उन्हें समय नहीं मिला. मगर अलका का फेसबुक पेज कुछ और ही कहता है. इसमें एक तस्वीर है, जिसमें अलका सोनिया और राहुल गांधी के साथ नजर आ रही हैं. तस्वीर पर तारीख लिखी है 6 जून. यानी तब तक सब ठीक था. गड़बड़ या कहें कि नाराजगी शुरू हुई टिकट कटने के बाद.
जरा गौर करें अलका के बयानों पर...
14 दिसंबर को अपने फेसबुक पेज पर अलका ने पोस्ट किया ये अपडेट- राहुल गांधी जी ने सही ही कहा है कि हमें 'आप' से सीखना चाहिए ओर नये आदमी या नई पार्टी से सीखने से आदमी 'छोटा' नहीं हो जाता, बल्कि कुछ सीखता ही है, कई मयानों में 'आप' ने राजनीति को 'देखने' ओर 'करने' के तरीकों को बदला है, ओर इस की शुरुवात भारत की राजधानी दिल्ली से हो इस से बेहतर ओर क्या हो सकता था.. अब 'आप' को भी आरोपों से हट कर अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए आगे आना चाहिए.
इससे पहले दिल्ली चुनावों के दौरान अलका ने कांग्रेस के लिए वोट मांगते हुए यह स्टेटस अपडेट किया- दिल्ली-निवासी व कांग्रेस की एक कार्यकर्ता होने के नाते मैं आप सभी दिल्ली-वासियों से उम्मीद ओर निवेदन करती हूं कि आप सभी 4 दिसंबर को अपना कीमती वोट सिर्फ़ ओर सिर्फ़ विकास के नाम पर ओर विकास को ज़ारी रखने के लिए देंगे.
टिकट नहीं मिला तो ऐसे निकली पीड़ा
अलका लांबा दिल्ली विधानसभा का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ना चाहती थीं. दावेदारी के दौरान उन्होंने बीजेपी और आम आदमी पार्टी पर सवाल उठाते हुए फेसबुक पर लिखा कि महिलाओं की भागीदारी, सुरक्षा और अधिकारों की बात करने वाले राजनैतिक दलों की कलई खुलने लगी है. दिल्ली विधानसभा चुनावों में अभी तक 'आप' पार्टी ने 70 में से 6 से 7 और बीजेपी ने 4 से 5 महिलाओं को ही अपना उम्मीदवार बनाया है. कथनी और करनी में ज़मीन आसमान का अन्तर. अब बारी कांग्रेस की है, उम्मीद करती हूं कि कम से कम कांग्रेस महिलाओं की उम्मीद पर खरी उतरेगी.
मगर जब अलका को टिकट नहीं मिला तो उन्होंने 15 नवंबर को लिखा कि कुछ लोगों को पार्टी में सब कुछ, कुछ को कुछ कुछ और कुछ को कुछ भी नहीं मिलता है, कुछ को सब कुछ 'मुफ्त' में ओर कुछ को उस कुछ की भारी 'कीमत' चुकानी पड़ती है, ओर कुछ 'मेरे' जैसे भी होते हैं, नाराजगी नहीं थमी. मगर अलका ने फिर भी यही कहा कि वह कांग्रेस में बनी रहेंगी. उन्होंने लिखा कि देश, मां और पार्टी छोड़ी नहीं जाती बल्कि उनकी जिम्मेदारी ली जाती है और मैं तीनों की सेवा के लिये एक देशभक्त, बेटी और कार्यकर्ता के तौर पर वचनबद्ध हूं.
कौन हैं अलका लांबा
दिल्ली यूनिवर्सिटी के दयाल सिंह कॉलेज और सेंट स्टीफंस कॉलेज में पढ़ाई. कांग्रेस के स्टूडेंट विंग एनएसयूआई की राजनीति. 1995 में दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन के प्रेसिडेंट का चुनाव जीतीं. लोकेश कपूर से शादी हुई. मगर कुछ बरसों बाद दोनों अलग हो गए. अलका का एक बेटा है, जिसका नाम ऋतिक है.
1997 में अलका एनएसयूआई की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं. 2002 में ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की महासचिव बनीं. 2003 में मोती नगर सीट से बीजेपी के हैवीवेट नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे मदनलाल खुराना के खिलाफ विधानसभा चुनाव हारीं. 2006 में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी की महासचिव बनीं. इसी साल गो इंडिया फाउंडेशन नाम का एनजीओ बनाया. 2007 से 2011 तक कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव रहीं.