दिल्ली के जहांगीरपुरी में हिंसा के बाद एक्शन शुरू हो गया है. लगातार आरोपियों की धरपकड़ की जा रही है. इस हिंसा के पीछे कौन-कौन हैं, इसका पता लगाने के लिए दिल्ली पुलिस की दस से ज्यादा टीमें लगी हुई हैं. दोनों पक्ष अपनी अपनी दलील दे रहे हैं, और पुलिस अबतक ये नहीं बता पाई है कि हिंसा की शुरुआत आखिर हुई कैसे. इस बीच आजतक की टीम ने हिंसा के दौरान मौजूद दो लोगों से खुफिया कैमरे पर बात की है जिन्होंने कई खुलासे किए हैं.
हिंसा के बाद जो तस्वीरें सामने आई हैं उनमें जहांगीरपुरी मस्जिद में भगवा झंडे भी नजर आ रहे हैं. कुछ मस्जिद परिसर के अंदर भी हैं. एक पक्ष का दावा है कि मस्जिद में भगवा झंडे लगाकर उकसाने की कोशिश की गई.
'हम मस्जिद के सामने रुके'
आजतक के स्टिंग ऑपरेशन में हनुमान जयंती शोभायात्रा में शामिल एक शख्स ने यह माना है कि एक गुट मस्जिद के सामने रुक गया था और यहां जय श्रीराम के नारे लगाए गए.
इंडिया टुडे की स्पेशल इन्वेस्टिगेटिंग टीम के सामने करण ने कहा कि अगर हिंदू मस्जिद के सामने नारे लगाते हैं, तो इससे किसी को ठोस नहीं पहुंचनी चाहिए. उन्होंने कहा, हम मस्जिद के बाहर रुके. यहां जय श्री राम कहने पर किसी को ऐतराज नहीं होना चाहिए.
उधर, जहांगीरपुरी हिंसा के मामले में पुलिस एक्शन में है. हिंसा के आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है. इसी बीच आजतक की टीम जहांगीरपुरी यह पता लगाने के लिए पहुंची कि आखिर यहां हिंसा क्यों हुई?
'दोनों तरफ से खूब पथराव हुआ'
खुफिया कैमरे पर बातचीत में करण ने कहा, उन्हें कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए थी (मस्जिद के सामने जय श्रीराम के नारे लगाने पर), फिर पत्थर क्यों फेंके गए. करण से जब पूछा गया कि जुलूस में शामिल लोगों ने भी क्या पथराव किया, इस पर उन्होंने बताया कि यह हमारे ऊपर पत्थर फेंकने पर यह जवाबी कार्रवाई की तरह था.
करण ने कहा, हम क्यों नहीं फेंक सकते. हम गांधी को मानने वाले नहीं हैं. अब पिटने पर दूसरा गाल कौन करेगा ? करण ने आगे कहा, दोनों तरफ से खूब पथराव हुआ. इसके बाद लोग भागने लगे. पेट्रोल फेंका गया. इसके बाद आगजनी हुई. इसके लिए पहले से साजिश की गई थी.
हालांकि, करण ने कहा, इसी रास्ते से जुलूस निकलना था. जुलूस कुछ सेकंड के लिए मस्जिद पर रोका गया, यहां जय श्री राम के नारे लगाए गए. इसके बाद पथराव होने लगा. हमारे जाने से पहले उन्होंने हमें पानी भी दिया.
'डीजे-झंडे की बात पर शुरू हुआ विवाद'
जहांगीरपुरी के रहने वाले राजा ने बताया कि शनिवार को उनके मोहल्ले में किस तरह से दंगा हुआ. हम सभी मुस्लिम जुलूस का वीडियो बना रहे थे. हमने एक दूसरे को गले लगाया. हाथ मिलाए. सम्मानजनक रास्ता दिया गया. तब तक कोई दिक्कत नहीं हुई. इस पर जब रिपोर्टर ने पूछा कि फिर हिंसा क्यों हुई?
इस पर राजा ने बताया कि कुछ लोग मस्जिद के सामने पहुंचे और बोले कि डीजे बजाया जाएगा. इन लोगों ने मस्जिद के सामने झंडा लहराने की कोशिश भी की. इसके बाद ये सब शुरू हुआ. अचानक हर तरफ अफरा तफरी मच गई. राजा ने बताया कि हर साल पुलिस की मौजूदगी में जुलूस निकाला जाता था. कभी ऐसी दिक्कत नहीं हुई. लेकिन इस बार जुलूस से 4-5 दिन पहले ही हिंदू मुस्लिम तनाव पैदा किया जा रहा था.
राजा ने जुलूस निकालने वाले लोगों पर उकसाने का आरोप लगाया. राजा के मुताबिक, जुलूस में शामिल लोग अचानक आए और डीजे बजाने लगे. जब उन्हें रोका गया, तो जुलूस में शामिल लोगों ने पथराव शुरू कर दिया. इसके बाद बवाल शुरू हुआ. अगर आपके साथ दुर्व्यवहार किया जाएगा तो आप क्या करेंगे? हमारी तरफ से भी लोग जमा हो गए. अफरा-तफरी मच गई और फिर पुलिस आ गई.
राजा ने एक वीडियो भी दिखाया, इसमें शोभायात्रा का वीडियो भी दिखाया, इसमें शख्स तलवार और हथियारों के साथ नजर आए. राजा के मुताबिक, ये ऐसे हथियार थे, जैसे हम दक्षिण भारत की फिल्मों में देखते हैं.
बता दें कि 16 अप्रैल को हनुमान जयंती के मौके पर दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में शोभायात्रा निकल रही थी. इस दौरान जब यात्रा मस्जिद के पास पहुंची तो दोनों पक्षों में झड़प हो गई. यहां पत्थरबाजी भी हुई. फायरिंग भी हुई. हालांकि, इस पूरी हिंसा में सिर्फ एक नागरिक जख्मी हुआ है, जबकि बाकी कुछ पुलिसकर्मियों को चोटें आई हैं. पुलिस ने अब तक इस मामले में 20 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है. अब पुलिस इसके पीछे की साजिश का पता लगा रही है.