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लॉकडाउन से दिल्ली में गिरा अपराध का ग्राफ, स्ट्रीट क्राइम में 56 फीसदी कमी

महिलाओं के खिलाफ अपराध में भी कमी आई है. पिछले साल मई तक रेप के 891 मामले दर्ज हुए थे, जबकि इस बार मई तक 520 मामले सामने आए हैं.

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प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

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  • सड़क पर अधिक रही पुलिस की मौजूदगी
  • संगीन अपराध के मामले लगभग पहले जैसे

कोरोना वायरस की महामारी के कारण देश में लॉकडाउन लागू था. इसका असर अपराध पर भी देखने को मिल रहा है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी अपराध का ग्राफ गिरा है. दिल्ली में आपराधिक वारदातें पिछले साल की तुलना में काफी कम हुई हैं. स्ट्रीट क्राइम के मामलों में 56 फीसदी गिरावट आई है. इसकी मुख्य वजह सड़क पर पुलिस की मौजूदगी, जगह-जगह लगाई गई पिकेट और अधिक पेट्रोलिंग बताई जा रही है.

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लॉकडाउन के दौरान नियमों का अनुपालन कराने के लिए पुलिस की मौजूदगी सड़क पर अधिक रही. पुलिस ने लॉकडाउन का पालन कराने के लिए अधिक पेट्रोलिंग भी की. हरियाणा और यूपी के बॉर्डर भी सील रहे और कड़ाई से चेकिंग भी की गई. इस वजह से अन्य राज्यों के अपराधी जो आराम से दिल्ली में प्रवेश कर आपराधिक वारदातों को अंजाम दिया करते थे, इस बार लॉकडाउन के कारण प्रवेश करने में विफल रहे.

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दिल्ली पुलिस के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2019 में दिल्ली में लूट की 964 वारदातें हुई थीं. जबकि इस साल मई तक लूट के 596 मामले सामने आए हैं. इसी तरह स्नेचिंग के मामलों में भी कमी आई है. साल 2019 में जहां मई माह तक स्नेचिंग के 2811 मामले सामने आ चुके थे, वहीं इस बार इन मामलों में भी गिरावट आई है. इस साल मई तक स्नेचिंग के 2141 मामले दर्ज किए गए हैं.

महिला अपराध में भी आई कमी

महिलाओं के खिलाफ अपराध में भी कमी आई है. पिछले साल मई तक रेप के 891 मामले दर्ज हुए थे, जबकि इस बार मई तक 520 मामले सामने आए हैं. वहीं सेक्सुअल हैरेसमेंट के केसेस में भी 50 फीसदी कमी आई है. वाहन चोरी के मामलों में भी कमी आई है. पिछले साल 15 मार्च से 31 मार्च के बीच वाहन चोरी के 1982 मामले दर्ज हुए थे, वहीं इस साल इसी अवधि के दौरान 1243 मामले दर्ज हुए.

शून्य हुए अपहरण के मामले

हालांकि, संगीन अपराध में विशेष कमी नहीं दिख रही. हत्या, डकैती, अपहरण और हत्या के प्रयास के मामले पिछले साल के आंकड़े के करीब ही हैं. पिछले साल फिरौती के लिए अपहरण की एक घटना सामने आई थी. इस साल फिरौती के लिए अपहरण के मामले शून्य हैं. एक्सीडेंट्स पर नजर डालें तो मई तक 348 लोगों की मौत हुई थी. यह आंकड़ा भी लगभग आधा है.

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