दिल्ली के रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के बाहर उन लोगों की लंबी कतारें लगी हुई हैं, जो नोटबंदी के दौरान देश में नहीं थे. लाइन में लगे लोग आरबीआई की अव्यवस्था से परेशान हैं. काउंटर और टोकन की व्यवस्था ना होने की वजह से वरिष्ठ नागरिक, बीमार, विकलांग सब घंटों से कतार में लगे हैं.
भारवाए जा रहे हैं कई तरह के फॉर्म
कई लोग तड़के 5 बजे से ही कतारों में लगे हैं. लंदन गई हुई एक महिला ने रोते हुए अपनी परेशानी बताई कि बैंक उसके साथ कैसा सलूक कर रहे है. महिला और सीनियर सिटीजन होने के बावजूद रोज घंटों चक्कर लगवाए जा रहे हैं. परेशानी यही है कि लोगों से कई फॉर्म भरवाए जा रहे हैं और उसमें भी कोई ना कोई कमी निकाल कर वापस किया जा रहा है. फॉर्म एयरपोर्ट पर और कस्टमर विभाग में मिल रहा है.
रिटायर्ड लोग अपनी सेवा देने को तैयार
वहीं कई लोग ऐसे भी आए हैं, जो उस दौरान भारत में ही थे, पर किन्हीं कारणों से वे पैसे नहीं बदल पाए. इनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 मार्च तक का वक्त दिया था. कई रिटायर्ड लोग आरबीआई को अपनी सेवाएं देना चाह रहे हैं ताकि लोगों की परेशानी कम हो जाए.
सरकार के खिलाफ दायर की गई याचिका
वहीं इस मसले पर सरकार ने पहले 31 मार्च, 2017 तक का वक्त दिया था. इसके बावजूद 31 दिसंबर के बाद रिजर्व बैंक ने बड़े नोट लेने से इनकार कर दिया. सरकार की इस वादाखिलाफी पर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई. कोर्ट ने इस मुद्दे पर सोमवार को केंद्र और भारतीय रिजर्व बैंक से जवाब मांगा है.