केंद्र सरकार को दिल्ली के मास्टर प्लान-2021 में संशोधन की इजाजत भले ही मिली हो लेकिन इसका एक सिरा आम जनता के हाथ में भी है. हालांकि, आम जनता में संधोशन को लेकर अभी भी संशय कायम है. रिहायशी इलाके के साथ-साथ कमर्शियल इलाके के कारोबारियों ने भी आशंका जताई है कि उनकी बातें सुनी नहीं जाएंगी और अगर सुन भी ली गईं तो उन्हें दूर भी किया जाएगा या नहीं इस बात की भी पुष्टि नहीं है.
रेडीमेट मार्केट के जॉइंट सेक्रेटरी मनिंदर सिंह का कहना है कि आपत्ति सीलिंग के वक्त भी उठाई गई थी. इसके बाद भी इलाके की करीब 465 दुकानों को सील कर दिया गया. उनका कहना है कि सरकार या तो अध्यादेश लाए या फिर एमनेस्टी के तहत उनके इलाके को डी-सील कर दे. दुकानदारों का कहना है कि अध्यादेश में उन कारोबारियों के बारे में कोई बात नहीं है जिनकी दुकानें लोकल शॉपिंग कॉप्लेक्स के दायरे में नहीं आतीं. दुकानदारों ने बताया कि लोगों की आपत्तियों को किस तरह से दूर किया जाएगा इसके बारे में भी कुछ नहीं बताया गया.
लेकिन पार्किंग कहां करें यह एक बड़ा सवाल है. सिटी प्लानर्स मानते हैं कि मिक्स लैंड यूज तो मजबूरी की बात थी. संधोधन के बाद जो प्लान बनेगा वो पूरी दिल्ली का प्लान बनेगा. कोर्ट ने कहा कि संशोधन को अंतिम रूप देने से पहले 15 दिन में दिल्ली की जनता से आपत्तियां मांगी जाएं.
मास्टर प्लान-2021 में बदलावों को इसी साल 2 फरवरी को डीडीए बोर्ड ने मंजूरी दी थी. जिन्हें पब्लिक डोमेन में डालने के बाद डीडीए को लोगों से 741 सुझाव और आपत्तियां भी मिली थीं. इन सभी सुझावों और आपत्तियों के साथ बॉर्ड ऑफ इन्क्वायरी ने अपनी रिपोर्ट अथॉरिटी को सौंप दी थी. अब डीडीए फिर से इश्तेहार जारी कर लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगेगा. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट तय करेगी कि मास्टर प्लान लागू किया जा सकता है या नहीं .
ये है डीडीए का मास्टर प्लान
- सभी दुकानों, रेजिडेंशल प्लॉट्स और कॉम्पलेक्स पर एक समान FAR होगी.
- बेसमेंट का इस्तेमाल व्यवसायिक काम के लिए किया जा सकेगा.
- कई पेशेवर सेवाओं को मिक्स्ड लैंड यूज में शामिल किया गया है.
- ऐसी जगहों पर सिविक एजेंसियां पार्किंग, पानी और सीवेज की व्यवस्था करेंगी.
- पार्किंग की जगह ना होने पर कॉम्पलेक्स या रोड को पेडिस्टेरियन स्ट्रीट घोषित किया जाएगा.
- पार्किंग के लिए स्कीम एरिया में 5 फीसदी से ज्यादा ग्राउंड कवरेज को मंजूरी दी गई.
- प्लॉट में पार्किंग को बढ़ावा देने के लिए कन्वर्जन चार्ज में छूट की व्यवस्था की जाएगी.
- गोदाम के लिए भी नियमों में बदलाव किए गए हैं.
- 9 मीटर चौड़ी रोड पर 300 वर्ग मीटर के हिसाब से गोदाम बनाए जाएंगे.
- 12 मीटर चौड़ी रोड पर प्लॉट साइज के हिसाब से गोदाम बनाए जाएंगे.
- प्रदूषण कम करने के लिए प्लॉट में आने-जाने पर प्रतिबंध ताकि प्लॉट कूड़ाघर ना बन सके.