दिल्ली के इंद्रलोक इलाके में सड़क पर नमाज पढ़ रहे युवकों के साथ अभद्रता करने वाले पुलिसकर्मी के खिलाफ लोगों को गुस्सा कम नहीं हो रहा है. उसके निलंबन के बाद अब जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने गृह मंत्री अमित शाह को लेटर लिखा है. इसमें पुलिसकर्मी को सेवा मुक्त करने की मांग की है.
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने कहा कि ऐसी घटनाओं से वैश्विक स्तर पर देश की छवि खराब होगी. पुलिसकर्मी के रवैये से पता चलता है कि वो इस्लामोफोबिया की बीमारी से ग्रसित है. सांप्रदायिक शक्तियों की सोच से प्रभावित है. इसलिए वैचारिक सुधार के साथ उसको अपने काम के प्रति जिम्मेदार होने का प्रशिक्षण दिया जाना जरूरी है.
मौलाना मदनी ने लेटर में गृह मंत्री से कहा है, ऐसी घटनाएं, जिनमें कानून का पालन कराने वाले लोग 'अपराधी' की भूमिका निभाते हैं, प्रभावित समुदाय पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव डालते हैं. साथ ही इससे देश के दुश्मनों को वैश्विक स्तर पर देश की छवि को धूमिल करने का अवसर मिलता है.
मौलाना ने कहा कि हम यह स्वीकार करते हैं कि कानून-व्यवस्था को बहाल करने के लिए पुलिस को अपना कर्तव्य निभाना चाहिए. मगर, धार्मिक मामलों से निपटने में सावधानी बहुत जरूरी है. कानून प्रवर्तन एजेंसियों को निर्देश जारी करें कि वो नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें, चाहे उनकी धार्मिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो.
उन्होंने कहा कि कानून को अपने हाथ में लेने के बजाय उनके जीवन और उनकी स्वतंत्रता की रक्षा की जाए. साम्प्रदायिक और देश तोड़ने वाली ताकतों के हाथों की कठपुतली बनने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. उम्मीद है कि इस मामले में आपकी (गृह मंत्री) त्वरित और निर्णायक कार्रवाई से न्याय प्रणाली में विश्वास बहाल होगा.
इससे पहले इस घटना को लेकर डीसीपी नॉर्थ मनोज मीणा ने बताया था कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है. आरोपी पुलिसकर्मी को सस्पेंड कर दिया गया है. लोगों से अपील है कि शांति बनाए रखें. आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ कुछ और भी सख्त कदम उठाए जाएंगे.