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दुनिया की सबसे बड़ी नगर निगम, बजट भी दोगुना... फिर भी इंदौर से काफी पीछे है MCD

दिल्ली की नगर निगम पर आम आदमी पार्टी की सत्ता आते हुए दिख रही है. अब तक के रुझानों और नतीजों में आम आदमी पार्टी ने बहुमत हासिल कर लिया है. 250 वार्डों वाली एमसीडी में काबिज होने के लिए 126 वार्डों में जीत जरूरी है. एमसीडी दुनिया की सबसे बड़ी नगर निगम है, जो 2 करोड़ से ज्यादा लोगों को कवर करती है.

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दिल्ली एमसीडी में 250 वार्ड आते हैं. (फाइल फोटो)
दिल्ली एमसीडी में 250 वार्ड आते हैं. (फाइल फोटो)

दशकों बाद तीन से एक हुई दिल्ली नगर निगम की सत्ता पर आम आदमी पार्टी का कब्जा होता दिख रहा है. 250 वार्डों वाली एमसीडी में आम आदमी पार्टी को बहुमत मिलता दिख रहा है. वहीं, 15 साल से सत्ता में रही बीजेपी बाहर होती नजर आ रही है.

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एमसीडी की सत्ता में आने के साथ ही आम आदमी पार्टी के कंट्रोल में लगभग सबकुछ आ जाएगा. एक लिहाज से ये भी कह सकते हैं कि दिल्ली में भी 'डबल इंजन' की सरकार हो जाएगी. क्योंकि जन्म से लेकर मरने तक... हर छोटे-बड़े काम के लिए नगर निगम जाना पड़ता है.

राजधानी दिल्ली का 97 फीसदी इलाका एमसीडी के अंडर में ही आता है. बाकी का तीन फीसदी इलाका नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) और दिल्ली कंटेन्मेंट बोर्ड (DCB) के पास है. एमसीडी की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, दिल्ली नगर निगम के दायरे में लगभग 2 करोड़ लोग आते हैं. और ये इसे दुनिया की सबसे बड़ी नगर निगम बनाती है.

लेकिन बीते 10 साल से दुनिया की सबसे बड़ी नगर निगम होने का दर्जा दिल्ली से छीन गया था. वो इसलिए क्योंकि 2012 में नगर निगम को तीन हिस्सों में बांट दिया था. इसके बाद उत्तरी दिल्ली, पूर्वी दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली नगर निगम बन गए थे. पर इसी साल केंद्र सरकार ने फिर से तीनों को एक कर दिया है. 

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हालांकि, दुनिया की सबसे बड़ी नगर निगम होने के बावजूद दिल्ली नगर निगम काफी पिछड़ी है. आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने नगर निगमों के कामकाज के आधार पर जो रैंकिंग जारी की थी, उसके मुताबिक दक्षिणी दिल्ली 28वें, पूर्वी दिल्ली 42वें और उत्तरी दिल्ली 48वें नंबर पर थी. पहले नंबर पर इंदौर नगर निगम थी. 

इंदौर नंबर-1 कैसे?

इंदौर और दिल्ली नगर निगमों में जमीन-आसमान का अंतर है. दिल्ली की नगर निगम जहां 2 करोड़ से ज्यादा लोगों को हैंडल करती है, तो वहीं इंदौर 20 लाख के आसपास की आबादी को. 

इंदौर और दिल्ली नगर निगम का बजट में भी काफी अंतर है. तीनों नगर निगम एक होने के बाद एमसीडी ने 2022-23 के लिए 15,276 करोड़ रुपये का बजट जारी किया था. वहीं, इंदौर नगर निगम ने 2022-23 के लिए 7,262 करोड़ रुपये का बजट रखा है. यानी, इंदौर की तुलना में दिल्ली नगर निगम का बजट दोगुना से भी ज्यादा है.

पर इसके बावजूद इंदौर नंबर-1 कैसे? वो इसलिए क्योंकि नगर निगमों की इंडेक्स रैंकिंग जारी करने के लिए आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने जो पैमाने बनाए हैं, उन सभी पर इंदौर खरा उतरता है. 

कोई शहर रहने के लिहाज से कैसा है? कारोबार का स्तर कैसा है? लोगों का नजरिया कैसा है? गवर्नेंस और प्लानिंग कैसी है? सर्विसेस कैसी हैं? नगर निगम का फाइनेंस कैसा है? और भी कई सारे पैमाने थे. इन सभी पैमानों के आधार पर स्कोर दिया गया था और रैंकिंग जारी हुई थी. इसमें इंदौर का स्कोर 66.08 रहा था, जो देश में सबसे ज्यादा था. इंदौर नगर निगम को ये रैंकिंग 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों के इंडेक्स पर मिली थी. 

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वहीं, उस समय दक्षिणी दिल्ली नगर निगम का स्कोर 46, पूर्वी दिल्ली का 40.79 और उत्तरी दिल्ली का 37.66 रहा था. इस हिसाब से इस इंडेक्स में दक्षिणी दिल्ली 28वें, पूर्वी दिल्ली 42वें और उत्तरी दिल्ली 48वें नंबर पर था.

बीएमसी बनाम एमसीडी

तीनों के एक होने के बाद जहां दिल्ली दुनिया की सबसे बड़ी नगर निगम बन गई है तो वहीं मुंबई नगर निगम यानी बीएमसी देश की सबसे धनी नगर निगम है. बीएमसी का इस साल का बजट लगभग 46 हजार करोड़ रुपये है. यानी, दिल्ली नगर निगम से तीन गुना ज्यादा.

हालांकि, दिल्ली नगर निगम जहां लगभग 1,400 वर्ग किलोमीटर का इलाका कवर करती है तो वहीं बीएमसी में 437 वर्ग किलोमीटर का इलाका ही आता है. दिल्ली नगर निगम 2 करोड़ लोगों को हैंडल करती है और बीएमसी लगभग सवा करोड़. आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के इंडेक्स में बीएमसी 8वें नंबर पर है. 

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2019-20 में दिल्ली की तीनों नगर निगमों ने मिलाकर 21,802 करोड़ रुपये की कमाई की थी. जबकि, उस साल बीएमसी ने 24,984 करोड़ रुपये कमाए थे. 

एमसीडी पर जिसका कब्जा, वही 'दिल्ली का राजा'

आम लोगों से जुड़े लगभग सभी मुद्दे दिल्ली नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आते हैं. कुल मिलाकर कहा जाए तो दिल्लीवाले कैसे जिएंगे? ये सब दिल्ली नगर निगम ही तय करती है. ऐसा भी कहा जा सकता है कि एमसीडी पर जिसका कब्जा, वही दिल्ली का 'राजा' होगा.

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एमसीडी की कमाई में लगभग 25 फीसदी हिस्सेदारी प्रॉपर्टी टैक्स की ही होती है. 2019-20 में तीनों नगर निगमों ने लगभग साढ़े पांच हजार करोड़ रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स हासिल किया था.

वहीं, अगर दिल्ली में प्रचार करना है तो उसके लिए एमसीडी से ही परमिशन लेनी होगी. दिल्ली में कहीं भी पोस्टर लगाना हो या फिर होर्डिंग लगाना हो, उसके लिए एमसीडी की मंजूरी जरूरी होगी.

इसके अलावा दिल्ली से आना हो या जाना हो, इसके लिए टोल टैक्स भी चुकाना है जो एमसीडी के पास जाता है. 2019-20 में एमसीडी ने 1,200 करोड़ रुपये का टोल टैक्स वसूला था.

दिल्ली नगर निगम के पास कौन-कौन से अधिकार?

- सफाईः दिल्ली की कॉलोनियों और सड़कों पर साफ-सफाई करने, कूड़ा इकट्ठा करने और उसका निपटारा करने की जिम्मेदारी नगर निगम की है. घरों से कूड़ा इकट्ठा करना और उसको निपटाना. 

- स्कूल, अस्पताल, डिस्पेंसरीः प्राइमरी शिक्षा के लिए स्कूल, डिस्पेंसरी और कुछ अस्पतालों का जिम्मा भी नगर निगम के पास होता है. 

- टैक्स कलेक्शनः दिल्ली में लगभग 50 लाख संपत्तियां हैं. इन पर लगने वाला प्रॉपर्टी टैक्स नगर निगम ही वसूलती है. इसके अलावा टोल टैक्स भी नगर निगम ही लेती है.

- नक्शों को मंजूरीः दिल्ली में अगर कोई घर बनाना है या बिल्डिंग बनानी है तो उसका नक्शा एमसीडी ही पास करती है. बिल्डिंग अवैध बनी है और उसे तोड़ना है तो उसका काम भी नगर निगम ही करती है.

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- सड़कों का रखरखावः नगर निगम सड़कों की साफ-सफाई तो करती ही है, साथ ही स्ट्रीट लाइट का जिम्मा भी इसी के पास होता है. दिल्ली के पार्कों का रखरखाव का काम भी नगर निगम ही संभालती है.

- अन्य कामः रहवासी इमारतों का रिकॉर्ड रखना, जन्म और मौत का रिकॉर्ड रखना, श्मशान और कब्रिस्तान को मैनेज करना और रेस्टोरेंट वगैरह के लिए लाइसेंस देना नगर निगम का काम है.

पिछली बार क्या रहे थे नतीजे?

दिल्ली नगर निगम में 15 साल से बीजेपी का कब्जा रहा है. अब तक दिल्ली में तीन नगर निगम हुआ करती थीं. इनमें नॉर्थ दिल्ली (NDMC), पूर्वी दिल्ली (EDMC) और साउथ दिल्ली (SDMC) नगर निगम थीं.

पिछली बार  272 वार्ड में से 181 पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी. जबकि आम आदमी पार्टी ने 48 और कांग्रेस ने 27 वार्ड जीते थे.

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