इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि एसोसिएशन के अध्यक्ष आर वी अशोकन की ओर से माफीनामा मीडिया को भेज कर उस पब्लिश करा दिया है. इस मामले पर जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने पतंजलि आयुर्वेद के खिलाफ भ्रामक मेडिकल विज्ञापन प्रकाशित करने के लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी.
आईएमए की ओर से में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस पटवालिया ने अदालत को बताया कि माफी मीडिया हाउस और आईएमए की वेबसाइट के साथ-साथ आईएमए की मंथली पत्रिका के पहले पेज पर भी पब्लिश की गई है.
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ आर वी अशोकन ने पतंजलि आयुर्वेद मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित मामले पर मीडिया में एक बयान दिया था, जिसमें उन्होंने डॉक्टरों के आचरण पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की थी.
एक समाचार एजेंसी से बात करते हुए आईएमए अध्यक्ष अशोकन ने कहा था कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि उच्चतम न्यायालय ने आईएमए और प्राइवेट डॉक्टरों की प्रैक्टिस की आलोचना की है.
आईएमए अध्यक्ष ने एक इंटरव्यू में अदालत के विचारों की आलोचना करते हुए दावा किया कि यह एक व्यापक विचार है जो अदालत को शोभा नहीं देता. उन्होंने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अदालत ने अस्पष्ट बयानों के आधार पर प्राइवेट डॉक्टरों की आलोचना की है, जिससे उनका मनोबल कम हुआ है."
अदालत ने माफी पर संज्ञान लिया और डॉ. अशोकन को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थिति से छूट दे दी है. वहीं, बेंच ने पतंजलि की ओर से पेश हुए वकील से यह भी कहा कि अगर वे चाहें तो 30 जुलाई को सुनवाई तय करते वक्त आईएमए अध्यक्ष द्वारा दायर हलफनामे का जवाब दें.
IMA को पतंजलि के दावों की पुष्टि का निर्देश
पतंजलि का कहना है कि सभी विज्ञापन हटा दिए गए हैं. सुनवाई के दौरान पीठ ने आईएमए से अपने हलफनामे में पतंजलि के दावों की पुष्टि करने के लिए भी कहा. उन्होंने सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से विज्ञापन हटा दिए हैं, खासकर उन 14 उत्पादों के संबंध में भी सभी विज्ञापनों को हटा दिया है. जिनके उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण ने लाइसेंस रद्द कर दिए थे.
शीर्ष अदालत ने इस मामले में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड शादान फरासत को न्याय मित्र भी नियुक्त किया है. अदालत ने उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण को सुनवाई की अगली तारीख से पहले सभी संबंधित हलफनामे रिकॉर्ड में लाने का निर्देश दिया है.