दिल्ली में पिछले साल हुई हिंसा के मामले में तिहाड़ जेल में बंद पिंजड़ा तोड़ ग्रुप की एक्टिविस्ट्स नताशा नरवाल, देवांगना कालिता और जामिया के स्टूडेंट आसिफ इकबाल तन्हा को गुरुवार को रिहा कर दिया गया. तीनों को मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने जमानत दे दी थी. जमानत देते हुए हाई कोर्ट ने तीखी टिप्पणियां की थीं. नताशा समेत तीनों एक्टिविस्ट्स तिहाड़ जेल से शाम करीब 7:30 पर बाहर आए. नताशा नरवाल ने जेल से बाहर आने के बाद कहा, ''मैं अपने ऊपर लगे आरोपों को जानकर स्तब्ध रह गई हूं. जब मैं जेल में थी, तब मैंने अपने पिता को खो दिया था. यह कठिन समय था, लेकिन मुझे जो समर्थन मिल रहा है उससे मैं खुश हूं.''
'खुली हवा में सांस लेकर अच्छा लग रहा'
नताशा ने आगे कहा, ''मेरे पिता नहीं हैं, इसलिए मैं पूरी तरह खुश नही हूं.'' नताशा जेल से शाम करीब सवा सात बजे बाहर आईं, लेकिन उनके साथी और परिवार वाले शाम 5 बजे से ही वहां पहुंचने लगे थे. वहीं, जेल से बाहर आने के बाद देवांगना कालिता ने बताया कि पुलिस ने मुझसे गहन पूछताछ की, लेकिन मैंने उनसे कहा कि हम प्रदर्शनकारी हैं और हमारा दंगों से कोई लेना-देना नहीं है. कोर्ट के आदेश से खुश हूं. खुली हवा में सांस लेना बहुत अच्छा लग रहा है. पिछले महीने नताशा नरवाल के पिता का कोरोना वायरस के चलते निधन हो गया था, जिसके बाद हाई कोर्ट ने उन्हें अपने पिता का अंतिम संस्कार करने के लिए अनुमति देते हुए कुछ दिनों के लिए जमानत दे दी थी. हालांकि, अवधि खत्म होने के बाद फिर से नताशा को जेल वापस जाना पड़ा था.
'अभी जारी रहेगी यह लड़ाई'
देवांगना कालिता ने आगे कहा, ''गिरफ्तार करने से पहले मुझसे पूछताछ की गई थी. हालांकि, अभी यह लड़ाई जारी रहेगी.'' उन्होंने कहा कि जमानत मिलने के बाद भी जेल से छूटने में तीन दिन लग गए, यह समझ के बाहर है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ. वहीं, आसिफ तन्हा ने भी कहा कि अभी उनकी लड़ाई जारी रहेगी. चाहे बार-बार जेल क्यों न आना पड़े. आसिफ तन्हा ने कहा कि जब वे पहली बार जेल गए तो उनके साथ मारपीट की गई थी, जिसकी शिकायत उन्होंने कोर्ट में की थी. बता दें कि पिछले साल की शुरुआत में दिल्ली के कई इलाकों में दंगे हुए थे. इसके बाद, तीनों को दिल्ली दंगों के मामले में मई महीने में गिरफ्तार कर लिया गया था. तीनों पर दंगों की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है. बाद में तीनों के खिलाफ यूएपीए भी लगा दिया गया था.
दिल्ली पुलिस ने बेल को SC में दी चुनौती
दिल्ली हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद एक्टिविस्ट्स के वकील ने तत्काल रिहाई की मांग करते हुए अदालत का रुख किया था और आरोप लगाया था कि यूएपीए मामले में कोर्ट द्वारा जमानत दिए जाने के बाद भी सरकार जानबूझकर उनकी रिहाई में देरी कर रही है. हाई कोर्ट ने वकील को कड़कड़डूमा अदालत का दरवाजा खटखटाने का निर्देश दिया, जहां पर तीनों की रिहाई का आदेश पारित किया गया. दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए जमानत के आदेश को चुनौती दी है. शुक्रवार को मामले की सुनवाई होने की उम्मीद है.
पिंजड़ा तोड़ ने कोर्ट के फैसले का किया स्वागत
वहीं, अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए, पिंजड़ा तोड़ ने एक बयान में कहा, "हम देवांगना, नताशा और आसिफ के लिए रिहाई वॉरेंट देने के दिल्ली सेशन कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं. यह दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा जमानत दिए जाने के दो दिन बाद आया है.'' उन्होंने आगे कहा कि हमने यह भी देखा है कि कैसे दिल्ली पुलिस ने तीन छात्र कार्यकर्ताओं की रिहाई में देरी करने की कोशिश की है और जमानत और स्थायी पते के सत्यापन के लिए 6 दिन तक की मांग की.