दिल्ली सरकार को सर्दियों के मौसम और त्योहारों को देखते हुए कोरोना के हालात से निपटने के लिए कई सलाह दिए गए हैं. कोरोना संकट को लेकर नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी के पॉल की अध्यक्षता वाले विशेषज्ञ समूह के दिशानिर्देश पर नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) ने रिपोर्ट तैयार की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में रोजाना 15,000 मामले सामने आ सकते हैं.
इस रिपोर्ट में दिल्ली में रोजाना आने वाले 15,000 मामलों के हिसाब से तैयारी करने को कहा गया है. रिपोर्ट का नाम 'दिल्ली में कोरोना नियंत्रण के लिए संशोधित रणनीति 3.0' है. यह रिपोर्ट दिल्ली सरकार को सौंप दी गई है. पूरी रिपोर्ट मुख्य रूप से 6 अहम बिंदुओं पर केंद्रित है.
दिल्ली सरकार को करने होंगे ये इंतजाम
रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्दियों में सांस की समस्या और गंभीर होती है. दिल्ली के बाहर से बड़ी संख्या में मरीज आ सकते हैं. दूर से आने वाले मरीज ज़्यादा सीरियस हो सकते हैं. इसके साथ ही त्योहार के चलते मामले अचानक बढ़ सकते हैं. इसलिए यह सिफारिश की जाती है कि दिल्ली सरकार 15 हजार पॉजिटिव मामलों से रोजाना निपटने के हिसाब से तैयारी करे और मॉडरेट-गंभीर बीमारी के मरीज़ों के अस्पताल में इलाज के लिए 20% यानी 3,000 बेड के हिसाब से व्यवस्था करे.
रिपोर्ट के मुताबिक इसी अनुपात और हिसाब से ICU, नॉन ICU, कोविड केयर, आइसोलेशन आदि की भी व्यवस्था की जानी चाहिए. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि ज्यादा भीड़ से संक्रमण के फैलने का खतरा ज्यादा होता है. इसे हर हाल में रोकना होगा. आने वाले समय में छठ पूजा, दिवाली, दशहरा क्रिसमस, ईद, नया साल का जश्न एक चुनौती होगी.
केरल, महाराष्ट्र में ऐसे बिगड़े हालात
रिपोर्ट में बताया गया है कि केरल में ओनम के बाद और महाराष्ट्र में गणेश उत्सव के बाद संक्रमण के मामलों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है. यह दिल्ली में नहीं होना चाहिए. अगर ऐसा होता है तो अभी तक के किए गए सारे काम पर पानी फिर सकता है.
सरकार को रिपोर्ट में सलाह दी गई है कि वह विपक्ष, धर्मगुरुओं और आम लोगों के साथ एक समन्वय स्थापित कर बड़ी भीड़ को त्योहारों के दौरान इकट्ठा होने से रोके. अगले तीन महीने कोरोना के खिलाफ जंग में अहम होंगे.
टेस्टिंग पर रिपोर्ट में कही ये बात
नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल की इस रिपोर्ट में दिल्ली में बढ़ी हुई टेस्टिंग का भी जिक्र है. कहा गया है कि जिस तरीके से टेस्टिंग की संख्या बढ़ाई गई है वह एक ख़ास या विशिष्ट तरीका नहीं है. टेस्टिंग की संख्या को लेकर रिपोर्ट में यह कहा गया है कि 6 से 8 जिलों में कुल पॉजिटिविटी रेट ज़्यादा है लेकिन टेस्टिंग की संख्या बहुत कम है.
टेस्टिंग को एक निश्चित लक्ष्य के तौर पर नहीं बल्कि कंटेनमेंट जोन में निगरानी के तहत पॉजिटिव और उनके संपर्क में आये लक्षण वाले व्यक्ति के आधार पर किया जाना चाहिए. सिर्फ टेस्टिंग के आंकड़े बढ़ाने से कोई फायदा नहीं बल्कि बढ़े हुए टेस्ट से ज्यादा मामलों की जानकारी मिलना अहम है.
रिपोर्ट में 24 सितंबर तक के आंकड़ों को आधार मानते हुए कहा गया है कि 80% से ज्यादा टेस्टिंग और कभी-कभी कुछ जिलों में 90 से 95 फीसदी टेस्टिंग रैपिड एंटीजन टेस्ट से हो रही है. इसका पॉजिटिविटी रेट केवल 4.3% है. बाकी के मामलों में RT-PCR द्वारा किए जा रहे टेस्टों से पॉजिटिविटी रेट 20.33% है.
रिपोर्ट के मुताबिक अभी ज्यादा टेस्टिंग रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और भीड़भाड़ वाली जगहों पर की जा रही है जिनमें ज्यादातर लोग बिना लक्षण वाले हैं. कंटेनमेंट जोन की टेस्टिंग और संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों की टेस्टिंग कुल टेस्टिंग का केवल 20% ही है. दिल्ली में 16 से 44 साल की आयु सीमा में मरने वालों की संख्या 17% से ज़्यादा है. अगर समय से टेस्टिंग और इलाज मिल जाये तो इस आयु वर्ग के मरीजों को मरने से बचाया जा सकता है.