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मिड डे मील मामले में एनजीओ का बयान, खाने में बच्चे ने डाला चूहा

जब बच्चों को खाना दिया जा रहा था तभी एक बच्चे की प्लेट में मरे हुए चूहे का बच्चा मिला. जिसके बाद मामले की जांच शुरू हुई. लेकिन ये खाना देने वाले एनजीओ का कहना है कि उन्हें तो पता ही नहीं की ये मरा हुआ चूहा कहां से आया.

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एनजीओ के मैनेजर
एनजीओ के मैनेजर

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राजधानी दिल्ली के एक स्कूल में जहां मिड डे मील में चूहे के मिलने की वजह से छठी क्लास के नौ बच्चे बीमार हो गए थे. वहीं अपनी साख बचाने में जुटी एनजीओ की तरफ से इसका ठीकरा बच्चों पर ही मढ़ा जा रहा है. जन चेतना जागृति एवं शैक्षिक विकासमंच के मैनेजर संजय मालिक ने कहा, हो सकता है कि बच्चों ने और खाने के लालच में ऐसा किया हो.

उन्होंने कहा कि रसोई में तो खाना बनाने से लेकर उसे स्कूल ले जाने तक साफ सफाई का विशेष ख्याल रखा जाता है. उन्होंने तो खाने से बीमार हुए नौ बच्चों पर बयान देते हुए कहा कि बच्चे पहले से बीमार थे.

गौरतलब है कि जब बच्चों को खाना दिया जा रहा था तभी एक बच्चे की प्लेट में मरे हुए चूहे का बच्चा मिला. जिसके बाद मामले की जांच शुरू हुई. लेकिन ये खाना देने वाले एनजीओ का कहना है कि उन्हें तो पता ही नहीं की ये मरा हुआ चूहा कहां से आया.

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दिल्ली के संगम विहार इलाके के एक किचन से मिड डे मील करीब 67 स्कूलों में सप्लाई किया जाता है. ये किचन जन चेतना जाग्रति एवं शैक्षिक विकासमंच के अंदर आता है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बताया जा रहा है कि इस मामले में आरोपी बने केपी सिंह जो इस संस्थान के मालिक हैं, वो दिल्ली के एक आप विधायक के सुसर हैं. पिछले 8 साल से ये स्कूलों में मिड डे मील सप्लाई कर रहे हैं. इस किचन में करीब 50 कर्मचारी है. जब आज तक की टीम इस किचन में पहुंची तो काम बहुत ही साफ तरीके से हो रहा था. लेकिन हकीकत में ये वही किचन है, जिसके मिड डे मील में चूहा मिला था और 9 बच्चे बीमार हो गए थे.

मिड डे मील में चूहा मिलने और बच्चों के बीमार होने की जानकारी मिलने के बाद दिल्ली के कुछ स्कूलों के टीचर भी यहां खाने की जांच के लिए पहुंच रहे हैं. मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है. लेकिन अब तक इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है. पुलिस का कहना है कि एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद ही सही मायने में ये साफ हो पाएगा कि आख़िरकार कसूरवार कौन है. तो वहीं दिल्ली के उपमुख्यमंत्री भी सख्त रवैया अपनाए हुए हैं.

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