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NGT ने कहा- द‍िल्ली सरकार 31 द‍िसंबर तक बताए कैसे रोकेगी प्रदूषण

द‍िल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए एनजीटी ने सख्त कदम उठाया है. एनजीटी ने द‍िल्ली सरकार को 31 द‍िसंबर का समय द‍िया है क‍ि वह क्लाइमेट चेंज एक्शन प्लान बनाकर दे. हालांक‍ि द‍िल्ली सरकार ने इसके ल‍िए 5 महीने का समय मांगा था.

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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (Photo: aajtak)
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (Photo: aajtak)

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प्रदूषण पर एक्शन प्लान बनाने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली सरकार को 31 दिसंबर तक का वक्त दिया है. कोर्ट ने सरकार को कहा है कि पूरी तैयारी करके बताएं कि प्रदूषण को बढ़ाने में कौन-कौन से कारक दिल्ली में जिम्मेदार हैं और उनको किस तरह से दूर किया जा सकता है. फिर चाहे वो कंस्ट्रक्शन से जुड़ा प्रदूषण हो या दिल्ली में वाहनों के इस्तेमाल से जुड़ा हो या फिर खेती के चलते होने वाला प्रदूषण हो. कोर्ट ने कहा है कि पिछले सालों में ग्रीन गैसों का दिल्ली में क्या प्रतिशत रहा है और उनका दिल्ली में फ‍िलहाल क्या स्तर है.

हालांकि कोर्ट,  दिल्ली सरकार से इस बात पर नाराज था कि लोग लगातार प्रदूषण की चपेट में आ रहे हैं और प्रदूषण का स्तर हानिकारक स्तर तक पहुंच रहा है लेकिन उसके बावजूद दिल्ली सरकार अब तक एक्शन प्लान बनाने में नाकामयाब रही है. गुरुवार को दिल्ली सरकार के डिप्टी सेक्रेटरी भी कोर्ट में पेश हुए. उनकी तरफ से कोर्ट से 5 महीने का वक्त मांगा गया था लेकिन कोर्ट ने उन्हें दिल्ली के क्लाइमेट चेंज एक्शन प्लान को बनाने के लिए दिसंबर तक का ही वक्त दिया है.

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14 साल पुराने डाटा का इस्तेमाल

याचिका लगाने वाले गौरव कुमार बंसल का कहना है कि सरकार अभी भी 2004 के क्लाइमेट चेंज एक्शन प्लान का ही डाटा इस्तेमाल कर रही है. इसका अर्थ है कि सरकार 14 साल पुराने डाटा को इस्तेमाल करके नया एक्शन प्लान बनाएगी जबकि पिछले डेढ़ दशक में दिल्ली के पर्यावरण और प्रदूषण की स्थिति में काफी परिवर्तन आया है. याचिकाकर्ता का कहना है कि हाल ही में दिल्ली आईआईटी की क्लाइमेट चेंज और प्रदूषण को लेकर आई रिपोर्ट्स को दिल्ली सरकार तवज्जो नहीं दी दे रही  है.

क्लाइमेट चेंज को लेकर अपना एक्शन प्लान तैयार करें

एनजीटी ने 2 साल पहले ही दिल्ली सरकार निर्देश दिया था कि वह क्लाइमेट चेंज को लेकर अपना एक्शन प्लान तैयार करे. इस एक्शन प्लान में दिल्ली सरकार को यह गाइडलाइन बनानी थी कि प्रदूषण के किस स्तर तक बढ़ने पर क्या-क्या कदम उठाने हैं. मसलन अगर आपातकालीन हालात हैं तो निर्माण कार्यों पर तुरंत बैन लगाने की जरूरत होगी, गाड़ियों का इस्तेमाल बंद करना होगा. ऑड-ईवन कब और कैसे लागू किया जाए. यह तमाम चीजें थीं जो सरकार को तय करके एक्शन प्लान में देनी थी लेकिन अभी भी दिल्ली और दिल्लीवासी दिल्ली सरकार के एक्शन प्लान का 2 साल से इंतजार ही कर रहे हैं, भले ही दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण कितना भी क्यों न बढ़ रहा हो. कोर्ट इस मामले में 2 जनवरी को दोबारा सुनवाई करेगा.

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