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यासीन मलिक को मिलेगी फांसी की सजा? दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची जांच एजेंसी NIA

2022 में दिल्ली NIA कोर्ट ने UAPA औऱ देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप में यासीन मलिक को उम्रकैद की सजा सुनवाई थी. इसी मामले में याशीन मलिक ने अपना गुनाह कबूल किया था जिसके बाद NIA कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनवाई थी. जांच एजेंसी यासीन मलिक को फांसी की सजा देने की मांग कर रही है.

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यासीन मलिक (File Photo)
यासीन मलिक (File Photo)

कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक के खिलाफ जांच एजसी NIA दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची है. NIA ने हाईकोर्ट से यासीन मलिक को फांसी की सजा देने की मांग की है. इस मामले में सुनवाई सोमवार को होगी. दरअसल, 2022 में दिल्ली NIA कोर्ट ने UAPA औऱ देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप में यासीन मलिक को उम्रकैद की सजा सुनवाई थी. इसी मामले में याशीन मलिक ने अपना गुनाह कबूल किया था जिसके बाद NIA कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनवाई थी.

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दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में NIA की स्पेशल कोर्ट ने टेरर फंडिंग के मामले में कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. अदालत ने मलिक पर 10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया था. NIA स्पेशल कोर्ट  ने गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) और IPC के तहत विभिन्न अपराधों के लिए अलग-अलग अवधि की सजा सुनाई थी.

मलिक को दो अपराधों- आईपीसी की धारा 121 (भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना) और यूएपीए की धारा 17 (यूएपीए) (आतंकवादी गतिविधियों के लिए राशि जुटाना)- के खिलाफ सजा सुनाई गई थी. 

बता दें कि यासीन मलिक के खिलाफ यूएपीए कानून के तहत 2017 में आतंकवादी कृत्यों में शामिल होने, आतंक के लिए पैसा एकत्र करने, आतंकवादी संगठन का सदस्य होने जैसे गंभीर आरोप थे, जिसे उसने चुनौती नहीं देने की बात कही और इन आरोपों को स्वीकार कर लिया. यह मामला कश्मीर घाटी में आतंकवाद से जुड़े मामले से संबंधित हैं. 
 
वर्ष 2017 में कश्मीर घाटी में आतंकी घटनाओ में बहुत इजाफा देखने को मिला था. घाटी के माहौल को बिगाड़ने के लिए लगातार आतंकी साजिशें रची जा रही थीं और वारदातों को अंजाम दिया जा रहा था. उसी मामले में दिल्ली की विशेष अदालत में अलगाववादी नेता के खिलाफ सुनवाई हुई, जिसमें यासीन ने अपना गुनाह कबूल कर लिया. हालांकि एनआईए ने ट्रायल कोर्ट के सामने भी यासीन मलिक को फांसी की सजा दिए जाने की मांग की थी. निचली अदालत ने यह कहते हुए फांसी की सजा देने से इनकार कर दिया कि मौत की सजा केवल उन असाधारण मामलों में ही दी जानी चाहिए "जहां अपराध समाज की सामूहिक चेतना को झकझोरता हो".

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