निर्भया के चार गुनाहगारों को तिहाड़ जेल प्रशासन ने नोटिस जारी किया है. इस नोटिस में पूछा गया है कि क्या वह 7 दिन के भीतर दया याचिका दाखिल करेंगे, अगर नहीं तो तिहाड़ जेल प्रशासन आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करेगा.
अगर दया याचिका नहीं दाखिल की जाती है तो तिहाड़ जेल प्रशासन लोअर कोर्ट में अर्जी दाखिल कर डेथ वारंट हासिल करने की कोशिश करेगा, जिसके बाद आरोपियों को फांसी दी जाएगी.
तिहाड़ जेल प्रशासन की ओर से जारी किए गए नोटिस में कहा गया है कि 7 दिन के अंदर राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजें नहीं तो फिर तिहाड़ जेल आगे की कानूनी कार्यवाही यानी कि फांसी की सजा पर अपना कदम बढ़ाएगा.
गैंगरेप के आरोपी अक्षय, विनय और मुकेश तिहाड़ जेल में जबकि आरोपी पवन मंडोली जेल में बंद है. एक आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ में आत्महत्या कर ली थी.
निर्भया के गुनाहगारों को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है. अब उनके पास राष्ट्रपति की दया का एक ही विकल्प है. तिहाड़ ने साफ-साफ नोटिस में कहा है कि 1 हफ्ते के अंदर दया याचिका दाखिल कर दें.
राष्ट्रपति को सजा माफ करने का अधिकार
संविधान के अनुच्छेद 72 के मुताबिक, राष्ट्रपति फांसी की सजा को माफ कर सकते हैं, स्थगित कर सकते हैं, कम कर सकते हैं या उसमें बदलाव कर सकते हैं. लेकिन राष्ट्रपति अपनी मर्जी से ऐसा नहीं करते. संविधान में साफ कहा गया है कि राष्ट्रपति मंत्री परिषद से सलाह लेकर ही सजा माफ कर सकते हैं या उसमें छूट दे सकते हैं.
मौजूदा कानून के मुताबिक, मामले पर गृह मंत्रालय राष्ट्रपति को लिखित में अपना पक्ष देता है. इसे ही कैबिनेट का पक्ष मानकर राष्ट्रपति दया याचिका पर फैसला लेते हैं.