दिल्ली के एलजी अनिल बैजल ने केजरीवाल सरकार के महत्वाकांक्षी मोहल्ला क्लीनिक के प्रस्ताव को अनुमति दे दी है. हालांकि अब सवाल ये उठ रहे हैं कि जमीन और बुनियादी ढांचे के बिना सरकार 1000 मोहल्ला क्लीनिक के सपने को कैसे पूरा करेगी. एलजी ने प्रस्ताव पास करने के साथ ही सलाह दी है कि सरकार मोहल्ला क्लीनिक में मरीजों की उचित निगरानी के लिए 6 महीने के अंदर बायामेट्रिक ऑनलाइन सिस्टम लागू करे.
गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी सरकार ने पूरी दिल्ली में 1000 परमानेंट मोहल्ला क्लीनिक बनाने का दावा किया था. फिलहाल दिल्ली में परमानेंट मोहल्ला क्लीनिक की संख्या कम है, जबकि ज्यादातर क्लीनिक किराए के कमरों से चलाए जा रहे हैं. दिल्ली में अबतक कुल मोहल्ला क्लीनिक की संख्या महज़ 162 है. इसके अलावा कई परमानेंट मोहल्ला क्लीनिक भी तैयार किये गए हैं, जिनमे सरकार द्वारा नियमों की अनदेखी की वजह से इलाज शुरू ही नही हो पाया है. फिलहाल अरविंद केजरीवाल के सामने मोहल्ला क्लीनिक के लिए नई जमीन तलाशने और बुनियादी ढांचा तैयार करने की एक बड़ी चुनौती है.
इस पूरे मामले में 'आजतक' ने आम आदमी पार्टी के विधायक संजीव झा से बातचीत की. मोहल्ला क्लीनिक के लिए जमीन न मिलने के सवाल पर संजीव झा ने कहा, 'दिल्ली के विकास के लिए सभी को मिलकर काम करना चाहिए. मोहल्ला क्लीनिक के लिए पूरी कोशिश की जा रही है, क्योंकि कई जगहों पर लैंड पहले से चुन ली गयी है. मेरी विधानसभा में 10 से ज्यादा जगह हैं, लेकिन अब तक फ़ाइल पास न होने की वजह से काम रुका हुआ था. उम्मीद है 2 महीने में ज्यादातर मोहल्ला क्लीनिक का सेटअप पूरा हो जाएगा.
DDA और दिल्ली सरकार के पास जमीन की कमी
मोहल्ला क्लीनिक न बनने की वजह बताते हुए संजीव झा ने कहा कि गांव से सटी विधानसभा में ग्राम पंचायत या किसानी जमीन बहुत है, लेकिन समस्या की बड़ी वजह DDA और दिल्ली सरकार की जमीन न होना है. 'आप' विधायक संजीव झा के मुताबिक पीडब्ल्यूडी की जमीन पर मोहल्ला क्लीनिक खुलेगा या नहीं, इस पर एक बड़ी दुविधा थी. कई जगह पीडब्ल्यूडी की जमीन तो मिल गई, लेकिन आसपास टॉयलेट बने हुए थे. झा का कहना है कि अब एलजी ने अनुमति दी है तो उम्मीद है जहां क्लीनिक नही खुला था, वहां भी खुल जाएगा और सब साथ मिलकर अड़चनों को दूर करेंगे.
बीजेपी ने बताया भ्रष्टाचार का अड्डा
उधर दिल्ली बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने मोहल्ला क्लीनिक को भ्रष्टाचार का अड्डा बताया है. तिवारी ने आरोप लगाते हुए कहा कि मोहल्ला क्लीनिक के ज़रिए अरविंद केजरीवाल ने बहुत भ्रम फैलाए, जो इसके असफल होने की बड़ी वजह बनी है. बिना योजना के घोषणा कर दी गई, जिसका साफ अर्थ है कि केजरीवाल को काम करना नही आता है. सरकारी तंत्र में संविधान के तहत काम करना होता है, लेकिन बिना योजना के केजरीवाल घोषणा करते रहे. केजरीवाल पारदर्शिता के दुश्मन हैं. एलजी साहब संवैधानिक तरीके से अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन केजरीवाल संविधान को तार-तार कर रहे हैं.
फिलहाल एलजी अनिल बैजल ने मोहल्ला क्लीनिक का प्रस्ताव पास करते हुए सख्त सलाह दी है कि मोहल्ला क्लिनिकों में नियुक्त होने वाले डॉक्टर और स्टाफ हर तरह से योग्य होने चाहिये, जिनकी नियुक्ति पारदर्शी तरीके से हो.
इसके अलावा मरीजों की गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए प्रर्याप्त सुरक्षा इंतजाम करने के निर्देश भी दिए गए हैं. एलजी दफ़्तर ने बयान जारी करते हुए सरकार से साफ कहा है कि जमीन के इस्तेमाल या किसी निर्माण के लिए संबंधित जमीन के मालिक या एजेंसी द्वारा तय की गई शर्तों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए. साथ ही ज़रूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विभाग को संबंधित एजेंसी से अनुमति लेना अनिवार्य होगा.