जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय ने एक लोकल न्यूज पेपर में लाइब्रेरी और जलभराव का मुद्दा उठाने पर रिसर्च स्कॉलर को शोकॉज नोटिस थमा दिया. विश्वविद्यालय की कार्यवाही से नाराज छात्र ने अपने साथियों के साथ कॉलेज के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. हाथों में पोस्टर बैनर लेकर विरोध करते ये छात्र अपने साथी इमरान को भेजे गए शोकॉज नोटिस से नाराज हैं.
मीडिया में बोलने की सजा
दरअसल कुछ दिनों पहले जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के रिसर्च स्कॉलर इमरान ने एक लोकर न्यूज पेपर को कॉलेज की लाइब्रेरी और वॉटरलागिंग जैसी समस्या से अवगत कराया था. विश्वविद्यालय प्रशासन को जैसे ही इसकी जानकारी मिली उन्होंने छात्र पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए शोकॉज नोटिस थमा दिया.
छात्रों में नाराजगी
रिसर्च स्कॉलर इमरान के मुताबिक उन्होंने सिर्फ छात्र के मुद्दे उठाए थे, उनका विश्वविदयालय की छवि खराब करने की मंशा नहीं थी, इसके बावजूद सिर्फ मीडिया में बात करने पर ऐसा नोटिस थमा देना अभिव्यक्ति की आजादी पर चोट करने जैसा है. वहीं रिसर्च स्कॉलर राहुल मानते हैं कि अगर छात्र कैंपस की सच्चाई बताएं तो इसमें गलत क्या है?
प्रशासन की सफाई
विश्वविद्यालय प्रशासन से नाराज छात्रों ने नारेबाजी करते हुए शोकॉज नोटिस वापस नहीं लेने पर भूख हड़ताल पर बैठने की चेतावनी दी. वहीं जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के प्रवक्ता मुकेश रंजन ने 'आज तक' को बताया कि छात्र ने लाइब्रेरी में कुर्सियों की कमी और बारिश के दिनों में होस्टल एरिया के आसपास जलभराव होने की जानकारी स्टूडेंट वेलफेयर में दर्ज नहीं कराई. अगर छात्र ने आवेदन दिया होता तो विश्वविद्यालय तुंरत कार्रवाई करती.
बवाल बढ़ने के बाद नोटिस वापस लिया
प्रशासन के मुताबिक छात्र ने विश्वविद्यालय को समस्या से अवगत नहीं कराकर मीडिया में बयान दिया, जो कि विश्वविद्यालय के नियमों की अवमानना है. छात्र को सिर्फ शोकॉज नोटिस दिया गया था, कोई सजा नहीं दी गई. वहीं छात्र ने शोकॉज का जबाव भी दे दिया है. बहरहाल, छात्र का जबाव मिलते ही विश्वविद्यालय ने नोटिस वापस ले लिया. लेकिन सवाल ये है कि छात्रों को मीडिया तक जाने की जरुरत क्यों पड़ी, कहीं ये नोटिस महज दबाव में आकर वापिस तो नहीं लिया गया.