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चुनावी प्याज बेचने में जुटी शीला सरकार

प्याज निकाल रहा है आम जनता के आंसू. लेकिन आंखें शीला सरकार की भी छलक रही है. कहीं प्याज इस बार सत्ता की कुर्सी से बेदखल ना कर दे. तमाम कोशिशों के बाद अब शीला सरकार सस्ता प्याज खुद बेचने की मुहिम में जुट गई है. आज से दिल्ली सरकार एक हजार जगहों पर सस्ता प्याज बेचेगी.

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प्याज निकाल रहा है आम जनता के आंसू. लेकिन आंखें शीला सरकार की भी छलक रही है. कहीं प्याज इस बार सत्ता की कुर्सी से बेदखल ना कर दे. तमाम कोशिशों के बाद अब शीला सरकार सस्ता प्याज खुद बेचने की मुहिम में जुट गई है. आज से दिल्ली सरकार एक हजार जगहों पर सस्ता प्याज बेचेगी.

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प्याज की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार ने अब खुद ही एक हजार जगह अपने स्टॉल लगाने का फैसला किया है. इन स्टॉलों में 50 रुपये किलो प्याज आज से मिलेगा.

योजना के मुताबिक 600 सरकारी मोबाइल वैन दिल्ली के अलग-अलग 1000 जगहों पर प्याज बेचेंगी. इसके साथ ही  नैफेड, सफल और एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड सेंटर के काउंटरों पर सरकारी सस्ता प्याज मिलेगा.

हालांकि विपक्ष का कहना है कि सरकारी कोशिशें सिर्फ दिखावा है. अगर वाकई में सरकार जनता को राहत देना चाहती है तो पाकिस्तान से प्याज आयात करने की बात करने से पहले प्याज के निर्यात पर पाबंदी लगाती.

प्याज की बढ़ी कीमतों से जनता को राहत देने की शुरुआत कोशिशें फेल हुईं. अब देखना ये है कि क्या 1000 जगह 50 रुपये किलो प्याज का सरकारी फंडा कामयाब होगा?

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प्याज को लेकर जनता के आंसुओं और शीला सरकार के डर की यही 3 वजहें हैं. पहले सूखे की वजह से पैदावार कम हुई और फिर बारिश में बेकार हो गया प्याज. बाकी कसर जमाखोरों ने पैदा की. और कमर टूटने में बाकी योगदान निभाया प्याज के निर्यात ने. अब सवाल ये कि चुनावी साल में कैसे पार लगेगी शीला की नैय्या? प्याज से डरी सरकार ने आनन-फानन में बैठक की और प्याज पर नई रणनीति बनाई.

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