प्याज के दाम 100 रुपये पहुंचने से दिल्ली सरकार को पसीना आने लगा है. दिल्ली में प्याज के मुद्दे पर चुनाव जीतने वाली शीला दीक्षित को अब जनता के गुस्से का डर सताने लगा है. शीला ने पहले तो कीमतों में तेजी का ठीकरा मौसम की मार पर फोड़ दिया था लेकिन अब वे केन्द्रीय कृषि मंत्री शरद पवार और खाद्य आपूर्ति मंत्री केवी थॉमस से मिलकर सस्ती प्याज की दुकानें खुलवाना चाहती हैं.
दरअसल दिल्ली में प्याज मंडियों में भी बहुत मंहगा आ रहा है. दिल्ली की आजादपुर मंडी में मंगलवार को प्याज 55 से 70 रुपये किलो तक आया, जो बाजार में पहुंचते-पहुंचते सौ तक पहुंच गया. जाहिर है प्याज की ये कीमतें सुनकर लोगों में गुस्सा बढ़ रहा है और शीला को इसी का डर सताने लगा है.
शीला ने पहले दो दिनों में प्रेस को भी बुला लिया और कह दिया कि प्याज इसलिए महंगा है क्योंकि पिलिन तूफान के बाद जो बारिश हुई उसके बाद प्याज की सप्लाई कम हो गयी है. हालांकि बारिश सिर्फ नासिक के प्याज वाले इलाके में हुई है लेकिन राजस्थान के अलवर और उसके आसपास से प्याज आना भी कम हो गया है. राजस्थान में तो सरकार भी कांग्रेस की है.
नैफेड के प्रमुख विजेंदर सिंह ने आज तक को बताया कि अलवर और उसके आसपास के प्याज को दिल्ली के आढ़तियों ने खरीद लिया है और वही दामों को बढ़ा रहे हैं. उनका ये भी कहना है कि दक्षिण के बाजारों खासकर बेंगलुरु और हैदराबाद में तो प्याज के दाम 45 रुपये किलो तक आ गए हैं, लेकिन दिल्ली मे मंहगी प्याज बेची जा रही है.
इसी बीच खुद कृषि मंत्री शरद पवार कह चुके हैं कि प्याज दो तीन हफ्तों के बाद सस्ता होगा जब नई फसल आ जायेगी. यानी दिवाली और उसके बाद भी प्याज जनता को यूं ही रुलाता रहेगी. एक बात यह भी तय है कि यदि प्याज की कीमतों में तेजी नहीं थमी तो आने वाले विधान सभा चुनाव में यह शीला सरकार पर भारी पड़ सकती है.