सीआरपीसी की धारा 197 में हुए संशोधन को एक पुलिस अधिकारी ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है. दिल्ली पुलिस के निरीक्षक अनिल शर्मा ने याचिका में कहा है कि इस संशोधन के बाद पुलिस की कार्य क्षमता प्रभावित होगी.
2013 में किया गया संशोधन
सीआरपीसी की धारा 197 में किसी भी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी के खिलाफ मुकदमा चलाने से पहले संबंधित विभाग के प्राधिकारी से मंजूरी लेना अनिवार्य था, लेकिन 2013 में इसमें संशोधन कर महिलाओं के खिलाफ किसी अपराध के मामलों में लिप्त सरकारी कर्मचारी या अधिकारी पर मुकदमा दर्ज करने के लिए यह अनिवार्यता खत्म कर दी गई.
प्रभावित होगी काम करने की क्षमता
दिल्ली पुलिस के निरीक्षक अनिल शर्मा ने इस संशोधन को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है, जिस पर हाई कोर्ट सुनवाई कर रहा है. पुलिस ने हाई कोर्ट से कहा कि कानून में बदलाव करके महिलाओं के खिलाफ कथित अपराधों के मामलों में सरकारी कर्मचारी पर मंजूरी के बगैर मुकदमा चलाने की व्यवस्था से, गलत काम करने वाले लोगों को पुलिसकर्मियों के खिलाफ झूठे आरोप लगाना आसान होगा. इससे पुलिस की काम करने की क्षमता प्रभावित होगी.
स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच पर प्रभाव
पुलिस ने कहा कि कानून में बदलाव से स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच प्रभावित होगी. अधिकारी और कर्मचारी अपने कर्तव्यों का पालन नहीं कर पाएंगे. सीआरपीसी की धारा 197 में हुए संशोधन के बाद इसका खुला दुरुपयोग हो सकता है. पुलिस ने इसको लेकर एक हलफनामा भी हाई कोर्ट में फाइल किया है.
24 नवंबर को होगी सुनवाई
कोर्ट इस मामले पर 24 नवंबर को सुनवाई करेगी. सीआरपीसी की धारा 197 में हुए संशोधन के बाद किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ अगर कोई महिला किसी कथित अपराध के मामले में मामला दर्ज कराती है, तो सरकारी कर्मचारी को संरक्षण नहीं मिलेगा.