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मनोज के एनकाउंटर पर घि‍री दिल्ली पुलिस, मृतक की पत्नी ने लगाया पैसे के लिए मर्डर का आरोप

राजधानी के न्यू राजेन्द्र नगर में दिल्ली पुलिस के हाथों मारे गए मनोज वशिष्ठ के मामले में नया मोड़ आ गया है. उसके परिजनों ने पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाया है.

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राजधानी के न्यू राजेन्द्र नगर में दिल्ली पुलिस के हाथों मारे गए मनोज वशिष्ठ के मामले में नया मोड़ आ गया है. वशिष्ठ की पत्नी ने स्पेशल सेल पर पैसे के लिए मर्डर का इल्जाम लगाया है. मृतक की पत्नी ने मामले में सीएम अरविंद केजरीवाल से भी गुहार लगाई है.

मनोज के परिजनों ने पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाया है. वहीं, उसके पॉलिटिकल कनेक्शन और समाजसेवी होने की बात भी सामने आई है. वशिष्ठ के परिवार का दावा है कि उसके खिलाफ किसी तरह का केस दर्ज नहीं था. उस पर सिर्फ एक मामले में धोखाधड़ी का आरोप लगा था. वह अपने साथ पिस्तौल नहीं रखता था. उसको सीधे सिर में एक गोली मारी गई है.

उसके भाई ने बताया, 'मनोज को फोन पर किसी ने पॉलिटिकल मीटिंग के लिए रेस्टोरेंट में बुलाया था. वह उसे छोड़ने गया था. वापस आते समय ट्रॉनिक सिटी के पास उनके मारे जाने की सूचना मिली. मनोज की मां ने भी पुलिस पर हत्या का आरोप लगाया है.

कौन था मनोज
दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट मनोज बागपत के पावला बेगमाबाद गांव का रहने वाला था. वह एक प्राइवेट आरसीएस कम्पनी का मालिक था. उसकी शादी 2002 में हुई थी. उसकी दो बेटियां हैं. दो छोटे भाई अनिल और सुनील वशिष्ठ हैं. मनोज फिलहाल दिल्ली के पटेल नगर में रहता था. उसकी ससुराल राजेंद्र नगर में है. बागपत में उसका आना-जाना लगा रहता था.

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गौरतलब है कि मनोज कई साल से देश भक्त सेना ट्रस्ट चला रहा था. उसके ट्रस्ट का नारा था कि 'खाकी और खादी सुधरे, तो देश सुधरे'. इसके साथ ही मनोज सामाजिक कार्य भी करता था और पांच साल पहले विवाह समारोह आयोजित करके 101 गरीब लड़कियों की शादी कराई थी.

पत्नी भी है राजनेता
उसकी पत्नी प्रियंका वशिष्ठ ने 2010 में बसपा से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा था. चुनाव जीतने के बाद भी उसने आज तक सदस्यता की शपथ नही ली है. उसके छोटे भाई अनिल वशिष्ठ ने चैयरमैन पद के लिए चुनाव लड़ा, लेकिन हार गया.

दर्ज थे कई केस
पुलिस के मुताबिक, मनोज पर धोखाधड़ी के कई केस दर्ज थे. साल 2007 में उसके खिलाफ 420 का केस दर्ज हुआ था. 2002 में दिल्ली के जनकपुरी में उसके खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था. उसके खिलाफ 11 हजार लेकर लोगों को नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने का आरोप था. दिल्ली, यूपी और चंडीगढ़ में धोखाधड़ी के कई मामलों में पुलिस को भी उसकी सरगर्मी से तलाश थी.

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राजनीतिक गलियारे में भी था रसूख
जानकारी के मुताबिक, मनोज का राजनैतिक गलियारे में भी काफी रुतबा रहा है. यूपी के सीएम अखिलेश यादव हों या फिर केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, सभी से उसकी अच्छी खासी जान पहचान थी.

धोखाधड़ी के केस में दिया था घूस
मनोज के छोटे भाई अनिल का आरोप है कि 29 अप्रैल को एक पुलिस अफसर ने ठगी केस में फंसाने के नाम पर उससे 60 हजार रुपये घूस लिए थे. यही नहीं, एक पूर्व कर्नल और दिल्ली के एक एसीपी ने भी उसका टार्चर किया था.

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