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दिल्ली-NCR का बढ़ता प्रदूषण बना सैलानियों के लिए मुसीबत

ये हालात है दिल्ली की जो कि सैलानियों की पहली पसंद हुआ करता है. दुनिया भर से भारत आए सैलानी भी पहले राजधानी का ही रुख करते हैं. ऐसे में अगर जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए तो 'सांस का आपातकाल' दिल्ली पर भारी पड़ सकता है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

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राजधानी में दिनों दिन बढ़ता प्रदूषण अब ना केवल दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए बल्कि देश भर से यहां घूमने आने वाले सैलानियों के लिए दिक्कतें खड़ी कर रहा है. बदलते मौसम के साथ हवा में आई नमी के चलते पर्यावरण में मौजूद हानिकारक गैसें अब ग्राउंड लेवल पर बनी रहेंगी. जिससे हमारा दूषित हवा से कांटेक्ट सीधे और लंबे समय के लिए बना रहेगा. जिसके चलते सर्दियों से पहले ही फॉग या स्मॉग के हालात बने हुए हैं.

इस दूषित हवा के चलते दिल्ली-एनसीआर के लोगों को स्वास्थ्य संबंधित गंभीर बीमारियों से जूझना पड़ रहा है. खुद से खड़ी की गई इस गंभीर समस्या का कोई हल निकलता नहीं दिख रहा और खामियाजा सभी को भुगतना पड़ रहा है. देश भर से दिल्ली आए सैलानियों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. नासिक से दिल्ली आए एक परिवार से जब हमने जानना चाहा कि दिल्ली कैसी लगी तो उनका कहना था, "नासिक में तो खुली हवा है, यहां तो धुआं-धुआं, दो दिन से सूरज नहीं दिखा, सांस लेने में हमारी माता जी को दिक्कत आ रही है, ये ठीक नहीं है, ये राजधानी है... सरकार और लोगों को मिल कर कुछ हल निकालना होगा."

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गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से दिल्ली और आसपास के इलाकों में सूरज नहीं दिख रहा है. इसके कई कारण हैं पर स्वास्थ्य के लिहाज से ये बेहद हानिकारक है. पर्यावरणविद् आरती मुखर्जी इसके लिए सरकार को दोषी मानती हैं. उनका कहना है, "लोगों से उम्मीद करने से पहले सरकार को नीतियों में बदलाव लाने की जरूरत है. केवल पटाखों पर बैन और ऑड-इवन फॉर्मूला दूषित हवा को सुधार नहीं सकता. गार्बेज और क्रॉप बर्निंग के विकल्प तलाशने होंगे. कंस्ट्रक्शन साइट को लेकर सख्त कानून बनाने पर जोर देना होगा. सड़कों पर बढ़ती गाड़ियों के बेहतर विकल्प लोगों को मुहैया कराने होंगे जिससे लोग खुद गाड़ियां ना निकालने पर मजबूर हों. जरूरत त्वरित और ईमानदार पहल की है. नहीं तो आने वाला समय दिल्ली-एनसीआर पर पर्यावरण के लिहाज से बेहद भारी पड़ जाएगा."

दिल्ली की दूषित आबो-हवा एक गंभीर चिंता का समय है. दिल्ली घूमने आने वालों के लिए तो ये समस्या से ज्यादा शॉक का विषय है. चेन्नई से दिल्ली आए एक और परिवार का कहना है, "मैं शॉक्ड हूं, इतने सालों से दिल्ली घूमने का प्लान बना रहा था पर अब तो अफसोस हो रहा है. चेन्नई में हमारे गांव की हवा इतनी शुद्ध है. यहां तो आ कर ऐसा लग रहा है गैस चैम्बर में हैं. बहुत निराशा हुई. मुझे डर है कि मेरे बच्चे बीमार न पड़ जाएं."

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ये हालात है दिल्ली की जो कि सैलानियों की पहली पसंद हुआ करता है. दुनिया भर से भारत आए सैलानी भी पहले राजधानी का ही रुख करते हैं. ऐसे में अगर जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए तो 'सांस का आपातकाल ' दिल्ली पर भारी पड़ सकता है.

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