आम आदमी पार्टी के पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और राज्यसभा सचिवालय आमने-सामने हैं. सचिवालय ने चड्ढा को सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस भेजा था, जिसके खिलाफ चड्ढा ने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में याचिका दायर की है. इस मामले में गर्मी की छुट्टी के बाद 10 जुलाई को सुनवाई होगी.
राघव चड्ढा ने पटियाला हाउस कोर्ट में मुक़दमा दायर कर राज्यसभा सचिवालय के उस पत्र को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें सरकारी आवास के तौर पर आवंटित टाइप सात बंगला खाली करने को कहा गया है. याचिका में कहा गया है कि पूरी प्रक्रिया के बिना ऐसे किसी सांसद को आवंटन रद्द करने का नोटिस जारी करना गैरकानूनी है.
करीब दो महीने पहले 19 अप्रैल को पटियाला हाउस कोर्ट ने ऐसे मामलों में तय प्रक्रिया का पालन करने का निदेश दिया था. राज्यसभा सचिवालय ने चड्ढा को याचिका का विरोध करते हुए कहा है कि अदालत बिना उनकी दलील सुने ऐसे आदेश पारित नहीं कर सकती.
उन्होंने एक जून को अर्जी दाखिल कर कोर्ट में कहा था कि उनको राज्यसभा सदस्य के तौर पर कानूनी और वैधानिक रूप से राज्यसभा के सभापति के आदेश पर आवास आवंटित किया गया है. सचिवालय की दलील है कि आवंटन पत्र में परिस्थितियों के हवाले से साफ लिखा है कि उनको परिसर खाली करने को कहा जा सकता है, लेकिन चड्ढा की दलील है कि ये प्रक्रिया एक तरफा नहीं बल्कि बातचीत और समझौते से होगी. अब दोनों पक्षों की बात और दलीलें सामने आ गई हैं. कोर्ट इस पर 10 जुलाई को सुनवाई करेगा.
क्यों रद्द किया गया बंगले का आवंटन?
पहली बार सांसद बने जन प्रतिनिधियों के लिए सरकारी आवास का आवंटन टाइप-V दर्जे में होता है. इसी टाइप के आवास का पात्र होने के चलते उनको पहले अस्थाई तौर पर आवंटित टाइप सात का बंगला रद्द कर दिया गया था. इससे पहले सांसद चड्ढा ने एक प्रतिवेदन राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के पास भेजा था.
राज्यसभा सांसद के रूप में राघव चड्ढा का कार्यकाल अभी 5 साल से अधिक बचा है. राज्यसभा सचिवालय ने पहली बार राज्यसभा सांसद बने राघव चड्ढा को सबसे पहले नई दिल्ली में एक टाइप-VII बंगला आवंटित किया गया था जो आमतौर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री, राज्यपाल या मुख्यमंत्री को दिया जाता है.
इसके बाद उन्हें दूसरा नया बंगला उनकी सांसद कैटेगरी के अनुसार टाइप-VI राज्यसभा सचिवालय की हाउस कमेटी ने आवंटित किया था, जिसमें रेनोवेशन कराने के बाद से वह अपने परिवार के साथ रह रहे थे, लेकिन अब उनके सरकारी आवास का आवंटन टाइप-V का पात्र होने के चलते एक बार फिर से रद्द कर दिया गया.
इसके बाद राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पटियाला हाउस कोर्ट में अर्जी दाखिल कर दी. याचिकाकर्ता चड्ढा ने प्रतिवादी से 5.50 लाख रुपए हर्जाना मांगते हुई अदालत से जबरन बेदखल करने की आशंका जताई है.