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व्यंग्य: अरविंद के गाने के चलते AAP में फैला असंतोष

आम आदमी पार्टी को जो दूर से जानते हैं उन्हें भी पता है आम आदमी पार्टी में हर वक़्त एक ही चेहरा नजर आता है, एक ही नाम सुनाई देता है वो हैपार्टी संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का.

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अरविंद केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल

आम आदमी पार्टी को जो दूर से जानते हैं उन्हें भी पता है आम आदमी पार्टी में हर वक़्त एक ही चेहरा नजर आता है, एक ही नाम सुनाई देता है वो है पार्टी संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का. केजरीवाल के अलावा आम आदमी पार्टी से जुड़े किसी और नेता का नाम सामने आये इसका सीधा सा मतलब होता है, वो नेता पार्टी छोड़ रहा है या कोई दूसरी पार्टी छोड़ आम आदमी पार्टी में आ रहा है.

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दिल्ली के चुनावों में धुआंधार जीत के बाद जैसे-जैसे आम आदमी पार्टी के नेता ट्विटर से बाहर नजर आना शुरू हुए आम आदमी पार्टी में संकट गहराता गया. पार्टी फिर विवादों में घिरी है. स्टिंग्स हो रहे हैं, बैठक की बातें लीक हो रही हैं, रूठना-मनाना जारी है, चिट्ठियां लिखी जा रही हैं. ऐसे में ये स्पष्ट नही हो पा रहा कि असल विवाद किस बात पर है? केजरीवाल के संयोजक बने रहने पर है या किसी और मुद्दे पर?

जब हमने आम आदमी पार्टी का हालिया संकट समझने की कोशिश की तो कई तथ्य सामने आए, पार्टी में इस वक़्त कई मुद्दों और कई स्तर पर असंतोष उभर रहे हैं. नेताओं के साथ कार्यकर्ता भी पार्टी आलाकमान के फैसलों से नाखुश हैं. असंतोष की शुरुआत अरविंद केजरीवाल के उस आदेश के बाद हुई, जिसमें कहा गया था कि पार्टी के कार्यकर्ता होली भी पार्टी की टोपी लगाकर खेलें.

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पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं में से एक मुकुल बताते हैं, 'इस पार्टी के लिए लाठी-डंडे खाए, खून-पसीना बहाया, पार्टी की ये हालत अब देखी नहीं जाती. कौशाम्बी में बैठे लोग कार्यकर्ताओं की मुश्किलें समझते नहीं हैं. अरविंद चाहते हैं सब टोपी लगाकर होली खेलें, वो खुद मफलर पहनकर होली खेलेंगे, ये कल के लड़के भर लिए हैं पार्टी में. कीचड़ उछालना बस जानते हैं. कार्यकारिणी में जो लोग भरे पड़े हैं. उन्हें भी बस कीचड़ उछालना आता है. पीएसी में भी ऐसे ही लोग हैं. चुनाव तक ठीक था दूसरों पर उछालते थे, अब एक-दूसरे पर उछाल रहे हैं. पार्टी पर ही उछाल रहे हैं ऐसे में पार्टी की टोपी पर छींटें आएं ये बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे हम.'

योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी से निकालने की सुगबुगाहट भी चल रही है, लेकिन हमारे सामने उन दोनों की नाराजगी की वजह सामने आ गई. होली के दिन पार्टी मुख्यालय में होली मिलन समारोह रखा गया है. प्रशांत भूषण को डर है कि कुमार विश्वास फिर सामने लोगों को देख ‘कोई दीवाना कहता है...’ सुनाने लगेंगे.

योगेंद्र यादव दबी-जुबान कहते हैं कि अब पार्टी में रहना मुश्किल होता जा रहा है. पहले तो माइक मिलते ही सिर्फ कुमार शुरू हो जाते थे अब तो अरविंद भी ‘इंसान का इंसान से हो भाईचारा...’ गाने से नहीं चूकते.

(यह व्यंग्य लेखक की कल्पना मात्र है.)

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