सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 14 वर्षीय कथित रेप पीड़िता की चिकित्सीय जांच का आदेश दिया है. दरअसल, उसने अपनी 28 सप्ताह के गर्भ को गिराने की मांग करते हुए कोर्ट में याचिका लगाई थी. मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ रेप पीड़िता की ओर से तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की मांग को लेकर भेजे गए एक ई-मेल पर गौर करने के बाद मामले की तत्काल सुनवाई के लिए शाम करीब साढ़े चार बजे एकत्र हुई.
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने मामले में सरकार का प्रतिनिधित्व किया. अगर पीड़िता चिकित्सीय गर्भपात कराती है या उसे ऐसा न करने की सलाह दी जाती है, तो ऐसे में लड़की की संभावित शारीरिक और मनोवैज्ञानिक स्थिति क्या होगी, इस बारे में अदालत ने मुंबई के सायन अस्पताल से रिपोर्ट मांगी है.
पीठ ने कहा कि अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक एक मेडिकल बोर्ड का गठन करेंगे. कोर्ट से मामले की सुनवाई की अगली तारीख 22 अप्रैल तय की है. उसी दिन मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट अदालत के समक्ष रखी जाएगी. मामले की सुनवाई सोमवार सुबह 10:30 बजे होगी.
लड़की की मां की तरफ से दायर याचिका पर शीर्ष अदालत सुनवाई कर रही थी, जिसमें बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था. याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में पेश वकील ने कहा कि नाबालिग 28 सप्ताह की गर्भवती है और फिलहाल मुंबई में है.
बताते चलें कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (एमटीपी) अधिनियम के तहत, विवाहित महिलाओं के साथ-साथ विशेष श्रेणियों की महिलाओं के लिए गर्भावस्था को समाप्त करने की अधिकतम सीमा 24 सप्ताह है. इनमें रेप विक्टिम और अन्य कमजोर महिलाएं जैसे कि विकलांग और नाबालिग शामिल हैं.