लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी वक्फ बिल पास हो गया है. वक्फ बिल का समर्थन करने पर शाहनवाज हुसैन ने सोशल मीडिया के जरिए खुद को धमकियां मिलने का दावा किया है. उन्होंने कहा कि मुझे ढेर सारी धमकियां मिल रही हैं. क्योंकि मैंने वक्फ बिल का समर्थन किया है और सरकार का पक्ष रखा है. लेकिन मैं डरने वाला नहीं हूं. मैं किसी धमकी से डरने वाला नहीं हूं. गालियों से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है.
इधर, वक्फ बिल को लेकर चिराग पासवान ने विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मामले में सिर्फ भ्रम फैलाने का काम कर रहा है. CAA के समय भी भ्रम फैलाया था. लेकिन समय के साथ मुसलमानों को भी पता चला कि किसी की नागरिकता नहीं गई. बावजूद इसके विपक्ष झूठ फैलाकर मुसलमानों को डराने का काम करता रहता है.
आपको बता दें कि वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 शुक्रवार को राज्यसभा में 12 घंटे से अधिक लंबी बहस के बाद पारित हो गया. विधेयक के पक्ष में कुल 128 वोट पड़े, जबकि इसके विरोध में 95 वोट पड़े. अब इस विधेयक को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास उनकी मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. उसके बाद यह कानून बन जाएगा.
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इससे पहले गुरुवार को लोकसभा ने 12 घंटे से ज़्यादा चली बहस के बाद इस विधेयक को मंज़ूरी दे दी थी. निचले सदन में इस विधेयक का 288 सांसदों ने समर्थन किया जबकि 232 ने इसके ख़िलाफ़ वोट किया. राज्यसभा में विधेयक पर एनडीए और इंडिया ब्लॉक के नेताओं के बीच तीखी बहस हुई.
राज्यसभा में बहस में भाग लेते हुए अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विधेयक को विभिन्न हितधारकों द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर कई संशोधनों के साथ लाया गया है. बोर्ड में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने के बारे में बताते हुए मंत्री ने कहा, "वक्फ बोर्ड एक वैधानिक निकाय है. सभी सरकारी निकायों को धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए." हालांकि, उन्होंने कहा कि गैर-मुस्लिमों की संख्या 22 में से केवल चार तक सीमित कर दी गई है.
रिजिजू ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी नहीं बल्कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल वक्फ विधेयक के जरिए मुसलमानों को डराने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "आप (विपक्ष) मुसलमानों को मुख्यधारा से बाहर कर रहे हैं." उन्होंने कहा कि 60 साल तक कांग्रेस और अन्य ने देश पर शासन किया, लेकिन मुसलमानों के लिए कुछ खास नहीं किया और समुदाय गरीबी में जी रहा है.