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दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान 2% भी नहीं, फिर कैसे जहरीली हो रही हवा? जानें कारण

पराली जलाने के मुद्दे पर लगातार चर्चा के बावजूद, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण के लिए सबसे बड़ा कारण डीजल और पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियां हैं. दिल्ली के प्रदूषण में गत 15 अक्टूबर को पराली से होने वाले धुएं का योगदान 1.2% पर पहुंच गया था वरना अक्टूबर की शुरुआत में यह 1% से नीचे था.

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दिल्ली के वायु प्रदूषण में पराली जलाने से निकलने वाले प्रदूषकों का योगदान 2 फीसदी भी नहीं. (PTI Photo)
दिल्ली के वायु प्रदूषण में पराली जलाने से निकलने वाले प्रदूषकों का योगदान 2 फीसदी भी नहीं. (PTI Photo)

ठंड का मौसम जैसे-जैसे नजदीक आता है दिल्ली की हवा बिगड़ने लगती है. राज्य सरकार इसके लिए पड़ोसी राज्यों हरियाणा और पंजाब में पराली (धान की कटाई के बाद खेत में बचा डंठल) जलाने की घटनाओं को जिम्मेदार मानती है. हालांकि, आंकड़े कुछ और ही बयां करते हैं. दिल्ली के प्रदूषण में 19 अक्टूबर को पराली जलाने से होने वाले धुएं की हिस्सेदारी 1.3% थी. 20 अक्टूबर को इसके 2.3% और 21 अक्टूबर तक 2.4% रहने की उम्मीद है.

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दिल्ली के प्रदूषण में गत 15 अक्टूबर को पराली से होने वाले धुएं का योगदान 1.2% पर पहुंच गया था वरना अक्टूबर की शुरुआत में यह 1% से नीचे था. पराली जलाने के मुद्दे पर लगातार चर्चा के बावजूद, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण के लिए सबसे बड़ा कारण डीजल और पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियां हैं. गत 18 अक्टूबर को दिल्ली की हवा खराब करने में गाड़ियों से निकलने वाले प्रदूषकों (Pollutants) का योगदान 14.2% और 19 अक्टूबर को 11.2% हो गया.

अनुमानों से संकेत मिलता है कि अगले दिनों में यह थोड़ा कम होकर 10.5% हो जाएगा. इसके अलावा, दिल्ली के आसपास के क्षेत्रों में कारखानों और कंपनियों से निकलने वाले प्रदूषक राष्ट्रीय राजधानी और एनसीआर में वायु गुणवत्ता संबंधी समस्याओं को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. नोएडा का योगदान लगातार 10-11% के बीच है, जबकि गाजियाबाद का हिस्सा 5-10% के बीच है. उत्तर प्रदेश का एक अन्य जिला, बुलंदशहर उल्लेखनीय 6-9% जोड़ता है. हरियाणा के गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे शहर क्रमशः 1.5-3% और 3-5% के बीच प्रदूषक फैलाने के लिए जिम्मेदार हैं.

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इसके विपरीत, दिल्ली में चलने वाली निर्माण गतिविधियों और सड़क की धूल का हवा खराब करने में योगदान क्रमशः 2% से कम और 1% तक है. इसी तरह, इंडस्ट्रियल वेस्ट और वेस्ट बर्निंग प्रदूषण स्तर बढ़ाने में मामूली योगदान देते हैं. पुणे स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी ने अपने शोध में कहा है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार 32-44% प्रदूषक किन स्रोतों से आते हैं उनकी पहचान अभी तक नहीं हो सकी है. इस कारण हर साल ठंड के मौसम में दिल्ली की वायु गुणवत्ता खराब होती है और इससे निपटने का कोई प्रभावी उपाय नहीं हो सका है. ये अज्ञात प्रदूषक कहां से आते हैं, यह शोध का विषय  बना हुआ है. दिल्ली एक बार फिर वायु प्रदूषण की चिंताओं से जूझ रहा है.

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